अंतरराष्ट्रीय निगाहों में बीएयू की धान क्रांति — आइआरआरआई टीम ने की प्रायोगिक फसलों की सराहना, अगले चरण में चुनेंगी सर्वश्रेष्ठ किस्में

News Saga Desk

रांची : बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) के चावल अनुसंधान प्रक्षेत्र में शुक्रवार को अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI) की मॉनिटरिंग टीम ने प्रायोगिक फसलों का अनुश्रवण किया। टीम ने अनुसंधान की दिशा और प्रगति को देखकर गहरी संतुष्टि व्यक्त की और इसे झारखंड की ऊपरी भूमि के लिए आशाजनक बताया।

टीम में फिलीपींस स्थित IRRI, मनीला के वैज्ञानिक डॉ. सलभ दीक्षित और हैदराबाद स्थित दक्षिण एशिया हब के विशेषज्ञ डॉ. प्रणब पॉल शामिल थे। उन्होंने DEMS-R Stage-1 और Stage-2 के तहत लगाए गए 228 धान प्रविष्टियों का निरीक्षण किया और कहा कि बीएयू की मेहनत झारखंड में सीधी बुआई की परिस्थितियों के लिए बेहतर किस्मों के विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

टीम ने सुझाव दिया कि आगामी वर्ष इनमें से 50 श्रेष्ठ प्रविष्टियों पर अनुसंधान केंद्रित किया जाए, जबकि तीसरे वर्ष में केवल 5 सर्वोत्तम किस्मों को आगे बढ़ाया जाएगा।

बीएयू के वैज्ञानिक डॉ. एखलाक अहमद ने शोध की तकनीकी जानकारी दी, जबकि इस अवसर पर डॉ. मनोज कुमार बर्णवाल, डॉ. अशोक कुमार सिंह और डॉ. बिनय कुमार भी उपस्थित रहे।

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