News Saga Desk
पटना | बिहार की राजनीति में रिश्ते और सत्ता की भूख एक बार फिर आमने-सामने है। इस बार अररिया जिले की जोकीहाट विधानसभा सीट से जहां पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत तस्लीमुद्दीन के बेटे आपस में ही ताल ठोक रहे हैं। यह सीट अब सिर्फ एक चुनाव क्षेत्र नहीं, बल्कि पारिवारिक विरासत और सत्ता की चाहत के बीच टकराव का मैदान बन गयी है।
जोकीहाट विधानसभा में इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प है। एक तरफ हैं जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार सरफराजआलम, जो इस सीट से चार बार प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। दूसरी तरफ राष्ट्रीय जनता दल के मौजूदा विधायक शाहनवाज आलम, जो वर्तमान बिहार सरकार में मंत्री रह चुके हैं।
2020 की हार और परिवार में फूट
सरफराज आलम ने 1996 में राजनीति में कदम रखा और कई बार विधायक रहे। वहीं, छोटे भाई शाहनवाज ने पिछले विधानसभा चुनाव 2020 में एआइएमआइएम के टिकट पर अपने भाई सरफराज आलम को हराकर ही धमाकेदार एंट्री की थी, जिससे इस राजनीतिक लड़ाई की नींव पड़ी।
2024 लोकसभा चुनाव में भी छाया पारिवारिक संघर्ष
2024 के लोकसभा चुनाव में राजद ने शाहनवाज आलम को अररिया से उम्मीदवार बनाया। सूत्रों के मुताबिक इस चुनाव में मिली उनकी हार के लिए भी पारिवारिक कलह को जिम्मेदार ठहराया गया। ऐसी खबरें थीं कि जोकीहाट क्षेत्र में अच्छी पकड़ रखने वाले सरफराज आलम ने कथित तौर पर अपने वोटरों को दूसरी पार्टियों के पक्ष में मोड़ने का काम किया, जिससे छोटे भाई को नुकसान हुआ।
इस बार जन सुराज ने जताया भरोसा
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में, सरफराज आलम ने राजद और जदयू सहित कई दलों का दरवाजा खटखटाने के बाद जन सुराज पार्टी से टिकट हासिल किया है, जिससे यह ‘भाई बनाम भाई’ की लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर आ गयी है।
त्रिकोणीय मुकाबले में फंसी जोकीहाट सीट
हालांकि, यह विधानसभा सीट सिर्फ दो भाइयों के संघर्ष तक सीमित नहीं है। इस बार जोकीहाट में तीन पूर्व मंत्रियों की उपस्थिति ने इसे एक हॉट सीट बना दिया है। जदयू ने भी यहां से पूर्व मंत्री मंजर आलम को मैदान में उतारा है, जिससे यह मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।
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