News Saga Desk
बिहार : बिहार में नई एनडीए सरकार के गठन के बाद अब राजनीतिक गतिविधियां तेज़ हो गई हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार की पहली कैबिनेट बैठक 25 नवंबर को सुबह 11 बजे आयोजित की जाएगी। हाल ही में विभागों के बंटवारे के बाद होने वाली यह कैबिनेट बैठक काफी अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसी में सरकार अपने शुरुआती बड़े फैसलों का रोडमैप तय करेगी। उम्मीद जताई जा रही है कि बैठक में नई विधानसभा के पहले सत्र को बुलाने पर मुहर लग सकती है।
शुक्रवार को मंत्रियों के बीच विभागों का वितरण पूरा किया गया। इस बार सबसे बड़ा बदलाव गृह विभाग को लेकर हुआ है, जिसे लगभग 20 साल बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से हटाकर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को सौंपा गया है। वहीं, नीतीश कुमार के पास सामान्य प्रशासन, मंत्रिमंडल सचिवालय, निगरानी और निर्वाचन विभाग की जिम्मेदारी बनी हुई है।
दूसरे उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा को भूमि राजस्व और खनन विभाग सौंपा गया है। नई कैबिनेट में अनुभव और युवा नेतृत्व का संतुलन साफ दिखाई दे रहा है। कई नए चेहरों को मौका दिया गया है, जबकि कुछ मंत्रियों को उनके पुराने विभाग फिर से मिले हैं। इसे गठबंधन के भीतर संतुलन बनाए रखने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल को उद्योग विभाग की कमान मिली है, जबकि नितिन नवीन को पथ निर्माण और नगर विकास विभाग का दायित्व सौंपा गया है। रामकृपाल यादव को कृषि मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह, संजय टाइगर को श्रम संसाधन विभाग और अरुणा शंकर प्रसाद को पर्यटन तथा कला, संस्कृति एवं युवा विभाग मिला है।
विभाग वितरण में सुरेन्द्र मेहता को पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग, नारायण प्रसाद को आपदा प्रबंधन और रमा निषाद को पिछड़ा व अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग सौंपा गया है। लखेन्द्र पासवान अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण विभाग संभालेंगे, जबकि श्रेयसी सिंह को आईटी और खेल विभाग की अहम जिम्मेदारी मिली है।
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