News Saga Desk
धर्मेंद्र का राजनीति में प्रवेश
बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता और ‘ही-मैन’ के नाम से मशहूर धर्मेंद्र अब हमारे बीच नहीं रहे। 89 वर्ष की उम्र में उनका निधन मुंबई में हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर उनके निधन की जानकारी देते हुए भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। अभिनय जगत में उत्कृष्ट योगदान देने वाले धर्मेंद्र ने राजनीति में भी कदम रखा और भाजपा के साथ अपना राजनीतिक सफर शुरू किया।
धर्मेंद्र ने साल 2004 में भारतीय जनता पार्टी के ‘शाइनिंग इंडिया’ कैंपेन से प्रभावित होकर पार्टी जॉइन की थी। शत्रुघ्न सिन्हा के मार्गदर्शन और लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात के बाद उन्हें राजस्थान के बीकानेर संसदीय सीट से चुनाव मैदान में उतारा गया। उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार रमेश्वर लाल डूडी को लगभग 60 हजार वोटों से हराकर लोकसभा की सदस्यता हासिल की।
मंचों पर अभिनेता वाली छाप
चुनावी सभाओं में भी धर्मेंद्र का स्टारडम लोगों को खूब आकर्षित करता था। ‘शोले’ सहित कई फिल्मों के लोकप्रिय डायलॉग्स उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान इस्तेमाल किए, जिससे जनता से उनका सीधा कनेक्शन बना रहा। उन्होंने एक रैली में कहा था कि यदि उनकी बात संसद में नहीं सुनी गई तो वे संसद की छत से छलांग लगा देंगे — और यह वादा भी उन्होंने फिल्मी अंदाज में किया, जिसे जनता खूब पसंद करती थी।
संसद में कम दिखे धर्मेंद्र
हालांकि, उनका राजनीतिक करियर अपेक्षा के अनुसार मजबूत नहीं बन सका। सांसद बनने के बाद उनकी संसद में उपस्थिति कम रही। बीकानेर की जनता ने भी इस बात पर नाराजगी जताई कि धर्मेंद्र चुनाव जीतने के बाद अपने क्षेत्र में कम दिखाई देते थे और फिल्मों व निजी जीवन में ज्यादा व्यस्त रहते थे। इसी कारण उन्होंने राजनीति से धीरे-धीरे दूरी बना ली।
300 से अधिक फिल्मों के सुपरस्टार
धर्मेंद्र ने अपने करियर में 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और अपने मजबूत अभिनय, रोमैंटिक इमेज व देहाती अंदाज से दर्शकों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी। ‘शोले’, ‘चुपके चुपके’, ‘धरम वीर’, ‘सत्यकाम’ और कई यादगार फिल्मों के जरिए उन्होंने भारतीय सिनेमा को नई ऊंचाइयां दीं।
अंतिम विदाई एक युग का अंत
मुंबई पुलिस ने उनके निधन की पुष्टि की है, जबकि परिवार की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार है। अस्पताल में वे पिछले कई दिनों से उपचाराधीन थे। उनके निधन के साथ फिल्म जगत ही नहीं, राजनीति और जनमानस में भी शोक की लहर है।
धर्मेंद्र की विरासत , चाहे वह बड़े पर्दे की लोकप्रियता हो या संसद तक पहुंचना , सदैव याद की जाएगी। उन्होंने साबित किया कि सिनेमा से निकलकर राजनीति तक का सफर भी बेहद प्रभावशाली हो सकता है।
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