News Saga Desk
सुपौल जिले के वीरपुर में शुक्रवार को कोसी–मेची लिंक परियोजना के पहले चरण की औपचारिक शुरुआत हुई। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत बनाई जा रही यह मेगा परियोजना उत्तर बिहार में बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। शुरुआती चरण में कटैया पावर हाउस से होकर बहने वाली भेंगा धार के नौ किलोमीटर हिस्से की चौड़ीकरण व गाद हटाने का काम तेजी से जारी है।
पहले फेज में 70 मीटर चौड़ी धार की खुदाई
परियोजना के आरंभिक कार्य के तहत 70 मीटर चौड़ी धारा की सफाई और खुदाई हो रही है। काम का जिम्मा हैदराबाद स्थित रित्विक कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा गया है। साइट पर तैनात सुप्रिटेंडिंग इंजीनियर मो. बाशा के अनुसार, कई हिस्सों में धारा को मूल बेड लेवल पर लाने के लिए 0.5 से 1 मीटर गहराई तक खुदाई की जा रही है। दो दर्जन से अधिक पोकलेन मशीनें लगातार मिट्टी व गाद निकालने में लगी हैं।
117.50 किमी लंबी लिंक, कोसी का अतिरिक्त पानी मेची में जाएगा
करीब 117.50 किलोमीटर लंबी यह लिंक परियोजना कोसी नदी के अतिरिक्त जल को मेची नदी में मोड़ेगी, जिससे बरसात के दौरान कोसी का दबाव कम होगा और बाढ़ की समस्या में कमी आने की उम्मीद है। परियोजना पूरी होने पर अररिया, पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार समेत उत्तर बिहार के बड़े हिस्से में सिंचाई क्षमता बढ़ेगी।
दूसरे चरण में 41 किमी नहर की सफाई, लागत 200 करोड़ रुपये
जल्द शुरू होने वाले दूसरे चरण में कोसी पूर्वी मुख्य नहर के 41 किलोमीटर हिस्से की सफाई शामिल है। इस चरण की अनुमानित लागत 200 करोड़ रुपये बताई जा रही है। सिंचाई प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता राजेश कुमार ने कहा कि बरसात से पहले अधिकतम काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है ताकि जलस्तर बढ़ने से निर्माण में कोई बाधा न आए।
2.14 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई लाभ
परियोजना पूर्ण होने पर 2.14 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ने और किसानों को बड़ी राहत मिलने की संभावना है। 6282.32 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली इस योजना का टेंडर प्रोसेस समाप्त हो चुका है और आने वाले वर्षों में यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई राह देने की उम्मीद जगाता है।
स्थानीय लोगों में उम्मीदें जागीं
भेंगा धार के आसपास के गांवों में चल रही गतिविधियों से लोगों में उत्साह है। वर्षों से बाढ़ और जलभराव की मार झेल रहे ग्रामीण अब इस परियोजना को राहत और नई संभावनाओं का आधार मान रहे हैं। लोग उम्मीद जता रहे हैं कि नहरों की सफाई और जलप्रवाह में सुधार से जलजमाव में कमी आएगी और खेती अधिक सुरक्षित व लाभकारी बनेगी।
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