रक्सौल-काठमांडू रेल लाइन प्रोजेक्ट में बड़ी प्रगति, जमीन सर्वे पूरा, जनवरी 2026 तक डीपीआर तैयार होने की उम्मीद

News Saga Desk

बिहार में चल रहे रेल विकास कार्यों में तेजी दिखाई दे रही है। डीडीयू–झाझा तीसरी और चौथी लाइन प्रोजेक्ट के बाद अब रक्सौल से काठमांडू तक नई रेल लाइन बिछाने को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। रक्सौल–काठमांडू रेल कॉरिडोर के लिए जमीन सर्वेक्षण का काम लगभग पूरा हो चुका है और संभावना है कि जनवरी 2026 तक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर ली जाएगी।

डीपीआर के बाद शुरू होगी टेंडर प्रक्रिया

जानकारी के अनुसार, कोंकण रेलवे द्वारा करीब 80 प्रतिशत सर्वे का काम पूरा कर लिया गया है। सर्वे रिपोर्ट दिसंबर में ही सौंप दी जाएगी, जिसके आधार पर डीपीआर तैयार होगा। डीपीआर बनते ही प्रोजेक्ट के लिए टेंडर जारी करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इस रेल लाइन के तैयार होने से बिहार और नेपाल के बीच आवागमन और अधिक सुगम होगा, साथ ही यह दिल्ली–नेपाल ट्रेन सेवा से भी जुड़ सकता है।

यात्रियों का समय बचेगा, 13 स्टेशन होंगे तैयार

रक्सौल से काठमांडू की वर्तमान 136 किलोमीटर की दूरी तय करने में लगभग 5 घंटे लगते हैं। नई रेल लाइन बनने के बाद यह समय घटकर लगभग 3 घंटे रह जाएगा। परियोजना के तहत रूट में कुल 13 स्टेशन बनाए जाएंगे। शुरुआती अनुमान के अनुसार इस पर लगभग 25 हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा, हालांकि यह राशि बढ़ भी सकती है।

डीडीयू–झाझा तीसरी और चौथी लाइन को पहले ही मिली मंजूरी

इससे पहले पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन से पटना और किऊल होते हुए झाझा तक लगभग 400 किलोमीटर लंबी तीसरी और चौथी रेल लाइन को मंजूरी मिल चुकी है। यह काम मार्च 2026 से शुरू होगा। परियोजना के लिए रेलवे बोर्ड पहले ही लगभग 17 हजार करोड़ रुपये स्वीकृत कर चुका है। तेज निर्माण के लिए पूरे रूट को दानापुर, फतुहा, बख्तियारपुर, पुनारख, किऊल और झाझा जैसे छोटे खंडों में बांटा गया है।

बिहार के लिए यह रेल कनेक्टिविटी सुधार राज्य और अंतरराष्ट्रीय यात्रा—दोनों के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

Read More News

Read More