बिहार: एक करोड़ नौकरी के लक्ष्य की ओर नीतीश सरकार, युवा रोजगार एवं कौशल विभाग को सौंपे 19 अहम कार्य

NEWS SAGA DESK

पटना। एनडीए सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रोजगार और शिक्षा के क्षेत्र में बड़े सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सरकार ने तीन नए विभागों — युवा रोजगार एवं कौशल, सिविल विमानन और उच्च शिक्षा — का गठन किया है। विभागों के कार्यों का वितरण भी कर दिया गया है, जिससे अब बिहार में कुल विभागों की संख्या 45 से बढ़कर 48 हो गई है।

युवा रोजगार एवं कौशल विभाग को सबसे बड़ी जिम्मेदारी

नवनिर्मित विभागों में युवा रोजगार एवं कौशल विभाग को सबसे अधिक 19 महत्वपूर्ण कार्य दिए गए हैं। यह विभाग उद्योगों, कंपनियों और एमएसएमई इकाइयों से जुड़कर राज्य के युवाओं के लिए व्यापक रोजगार अवसर तैयार करेगा। विभाग का मुख्य लक्ष्य अगले 5 साल में एक करोड़ युवाओं को नौकरी या रोजगार उपलब्ध कराना है।

सीएम नीतीश कुमार ने कहा है कि बड़ी संख्या में युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराकर ही यह लक्ष्य पूरा होगा।

कौशल विकास और प्रशिक्षण पर विशेष फोकस

इस विभाग को रोजगारपरक योजनाओं का निर्माण-क्रियान्वयन, आईटीआई संचालन, आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण, बिहार कौशल विकास मिशन की देखरेख, एनसीसी-एनएसएस-नेहरू युवा केंद्र का नियंत्रण, ई-पोर्टल संचालन और रोजगार मेलों के आयोजन जैसी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

सिविल विमानन विभाग को 7 बड़े कार्य

यह विभाग राज्य के एयरपोर्ट और हेलीपोर्ट के विकास-संचालन, नए छोटे हवाई अड्डों का निर्माण, वायु परिवहन विनियमन, केंद्र सरकार से समन्वय और सरकारी हेलीकॉप्टरों की खरीद-रखरखाव का काम देखेगा।

उच्च शिक्षा विभाग को 17 जिम्मेदारियां

इस विभाग को विश्वविद्यालय प्रबंधन, शोध-संस्थानों से समन्वय, पुस्तकालय स्थापना, शोध कार्यों को बढ़ावा, भाषाई अकादमियों का नियंत्रण, शिक्षक नियुक्ति और दूरस्थ शिक्षा की देखरेख जैसे कार्य सौंपे गए हैं।

तीनों विभागों में सचिव नियुक्त

सरकार ने सचिवों की नियुक्ति भी कर दी है —

  • उच्च शिक्षा: आईएएस राजीव रोशन
  • युवा रोजगार एवं कौशल: डॉ. कौशल किशोर
  • सिविल विमानन: निलेश रामचंद्र देवरे

मंत्री आवंटन अभी शेष

मंत्रिमंडल विस्तार तक ये तीनों नए विभाग मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास ही रहेंगे। इन नए विभागों का गठन और कार्य-वितरण रोजगार, कौशल विकास और उच्च शिक्षा में नई क्रांति की शुरुआत माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि इससे एक करोड़ नौकरी-रोजगार के लक्ष्य को हासिल करने का मार्ग और आसान होगा।

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