News Saga Desk
सोशल मीडिया पर इन दिनों नॉर्वे के एक छोटे से द्वीप सोमारॉय को लेकर एक अनोखी कहानी खूब वायरल हुई। दावा किया गया कि यहां घड़ियां नहीं चलतीं, लोग समय के बंधन से आज़ाद हैं और दिनचर्या घड़ी नहीं बल्कि मन तय करता है। कहा गया कि दुकानें, स्कूल और कामकाज तय समय पर नहीं चलते, लोग देर रात फुटबॉल खेलते या समुद्र में तैरते नजर आते हैं। लेकिन जब इस कहानी की पड़ताल हुई, तो इसकी हकीकत कुछ और ही निकली।
नॉर्वे उत्तरी यूरोप का एक विकसित देश है, जहां करीब 56 लाख की आबादी रहती है। देश की अर्थव्यवस्था तेल, गैस, मछली और हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर पर टिकी है। साथ ही नॉर्वे तेजी से ग्रीन एनर्जी और इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ रहा है। हाल ही में नॉर्वे ने रूस के साथ 2026 के लिए मछली पकड़ने का समझौता किया है, जिसमें समुद्री जीवन के संरक्षण के लिए कॉड मछली का कोटा 1991 के बाद सबसे कम रखा गया है। जलवायु परिवर्तन का असर यहां भी साफ दिख रहा है—आर्कटिक की बर्फ पिघल रही है और ग्लेशियर सिकुड़ते जा रहे हैं।
सोमारॉय की खासियत क्या है?
सोमारॉय नॉर्वे के उत्तर में बसा एक छोटा द्वीप है, जहां करीब 300 लोग रहते हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत यहां का सूरज है। गर्मियों में करीब 69 दिन तक सूरज नहीं डूबता, जबकि सर्दियों में लगभग 70 दिन तक अंधेरा छाया रहता है। इसी प्राकृतिक स्थिति के कारण यहां दिन और रात का फर्क कई बार धुंधला पड़ जाता है।
वायरल दावा और ‘टाइम-फ्री जोन’ की मांग
वायरल वीडियो और पोस्ट में दावा किया गया कि लोग घड़ियां नहीं पहनते और उन्हें पुल पर टांग दिया गया है। साल 2019 में द्वीप के एक निवासी क्जेल ओवे ह्वेडिंग ने प्रतीकात्मक रूप से सरकार से सोमारॉय को “टाइम-फ्री जोन” घोषित करने की मांग भी की थी। उनका तर्क था कि जब सूरज ही समय के नियम नहीं मानता, तो इंसानों पर सख्त समय-सारिणी क्यों हो।
सच्चाई क्या निकली?
बाद में यह स्पष्ट हुआ कि “बिना समय वाला द्वीप” पूरी तरह सच नहीं था। यह एक पर्यटन प्रचार अभियान था, जिसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया। नॉर्वे की पर्यटन एजेंसी Innovation Norway के निदेशक हाकोन हाउगली ने स्थानीय अखबार Aftenposten से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी और स्वीकार किया कि यह गलती थी। रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रचार पर करीब 50,000 यूरो (लगभग 4.83 लाख नॉर्वेजियन क्रोनर) खर्च हुए, जो ओस्लो और लंदन की पीआर एजेंसियों को दिए गए थे।
इस तरह, जो कहानी समय से आज़ादी का सपना दिखा रही थी, वह असल में एक मार्केटिंग प्रयोग निकली—हकीकत में सोमारॉय भी बाकी दुनिया की तरह समय के साथ ही चलता है।
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