News Saga Desk
भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज ने झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार और स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं लगातार बदहाली की ओर बढ़ रही हैं और मंत्री के बयान न सिर्फ जनता को भ्रमित कर रहे हैं, बल्कि संविधान, सेवा नियमों और कानून की मूल भावना पर भी गंभीर सवाल खड़े करते हैं.
राफिया नाज ने आरोप लगाया कि एक ओर स्वास्थ्य मंत्री मुस्लिम आयुष डॉक्टर को नौकरी देने की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर मुस्लिम बेटी के योग करने को अंग-प्रदर्शन बताकर दोहरा रवैया अपनाते हैं. उन्होंने इसे सामाजिक सौहार्द के लिए खतरनाक बताते हुए कहा कि इस तरह के बयानों पर स्वास्थ्य मंत्री के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 13(1)(a) और 13(2) के तहत कार्रवाई होनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार हर मंत्री शपथ लेता है, इसके बावजूद मंत्री द्वारा यह दावा करना कि वे तीन लाख रुपये प्रतिमाह वेतन पर नौकरी या मनचाही पोस्टिंग दिला सकते हैं, पूरी तरह असंवैधानिक है. कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि कोई मंत्री सीधे नौकरी दे सके. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ऐसा संभव है, तो सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले बच्चों के परिजनों को नौकरी क्यों नहीं दी गई.
भाजपा प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि स्वास्थ्य मंत्री सोशल मीडिया रील और बयानबाजी में ज्यादा व्यस्त हैं, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि राज्य में एंबुलेंस जैसी बुनियादी सुविधा तक समय पर नहीं मिल पा रही है. उन्होंने चाईबासा में चार माह के बच्चे की मौत का जिक्र करते हुए कहा कि समय पर एंबुलेंस न मिलने से बच्चे की जान चली गई, लेकिन मंत्री घटना की गंभीरता स्वीकार करने के बजाय बहस में उलझे रहे.
बजट को लेकर भी राफिया नाज ने सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि राज्य का स्वास्थ्य बजट करीब 7,427.50 करोड़ रुपये है और इसके अलावा 729 करोड़ रुपये का सप्लीमेंट्री बजट भी है, फिर भी जमीनी स्तर पर इसका दस प्रतिशत से अधिक प्रभावी उपयोग नहीं हो पा रहा है. उन्होंने सरकार से स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की.
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