लैंड फॉर जॉब घोटाला: लालू परिवार पर आरोप तय, राउज एवेन्यू कोर्ट में चलेगा ट्रायल

News Saga Desk

नई दिल्ली : नौकरी के बदले जमीन घोटाला मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, हेमा यादव सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं. अब सभी आरोपियों के खिलाफ नियमित ट्रायल चलाया जाएगा.

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला केवल अलग-अलग लेनदेन का नहीं, बल्कि एक संगठित आपराधिक साजिश की ओर इशारा करता है. कोर्ट के अनुसार, आरोपियों ने एक आपराधिक सिंडिकेट की तरह काम करते हुए जमीन के बदले रेलवे में नौकरी देने की साजिश रची. सीबीआई द्वारा पेश साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने माना कि आरोप तय करने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं.

बार-बार टलता रहा फैसला

गौरतलब है कि आरोप तय करने को लेकर कोर्ट का फैसला कई बार टल चुका था. 10 नवंबर की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रखते हुए फैसला 4 दिसंबर तक टाल दिया था. इसके बाद 4 दिसंबर को अगली सुनवाई 8 दिसंबर तय की गई. वहीं 8 दिसंबर को सुनवाई के दौरान फैसला 10 दिसंबर तक के लिए टाल दिया गया. आखिरकार 9 जनवरी को कोर्ट ने सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए.

क्या है ‘जमीन के बदले नौकरी’ मामला

यह मामला वर्ष 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे. सीबीआई का आरोप है कि इस दौरान पटना के 12 लोगों को ग्रुप-डी में नियमों को दरकिनार कर नौकरी दी गई और बदले में उनके परिवार के सदस्यों के नाम जमीन लिखवाई गई.

सीबीआई के अनुसार, लालू यादव की पत्नी राबड़ी देवी, बेटी मीसा भारती और हेमा यादव के नाम प्लॉट की रजिस्ट्री कराई गई और जमीन की मामूली कीमत नकद में चुकाई गई. आरोप है कि इन भर्तियों के लिए न तो कोई विज्ञापन जारी किया गया और न ही रेलवे बोर्ड को इसकी जानकारी दी गई. आवेदन देने के कुछ ही दिनों के भीतर नियुक्तियां कर दी गईं.

इस मामले में सीबीआई ने लालू परिवार समेत कुल 103 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, जिनमें से चार आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है.

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