News Saga Desk
नई दिल्ली : कोलकाता स्थित पॉलिटिकल कंसल्टेंसी और इलेक्शन मैनेजमेंट कंपनी आई-पैक (I-PAC) के कार्यालय पर गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है. रेड के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौके पर पहुंच गई थीं. ईडी का आरोप है कि ममता बनर्जी ने जांच में बाधा डाली और कुछ दस्तावेज अपने साथ ले गईं. इस मामले को लेकर ईडी अब हाईकोर्ट पहुंच गई है. वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से ईडी के खिलाफ दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज कराई गई हैं.
शुक्रवार को इस कार्रवाई के विरोध में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसदों ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास के बाहर प्रदर्शन किया. प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने डेरेक ओ’ब्रायन, शताब्दी रॉय, महुआ मोइत्रा, बापी हलदर, साकेत गोखले, प्रतिमा मंडल, कीर्ति आज़ाद और डॉ. शर्मिला सरकार सहित आठ सांसदों को हिरासत में लिया. बाद में सभी को संसद मार्ग थाने से रिहा कर दिया गया.
सांसदों की हिरासत के बाद टीएमसी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. पार्टी के नेता अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि लोकतंत्र को सजा दी जा रही है और जांच एजेंसियों का राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल हो रहा है. उन्होंने कहा कि बंगाल दबेगा नहीं और टीएमसी पूरी ताकत से इस लड़ाई को लड़ेगी.
टीएमसी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से भी अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा गया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे जनप्रतिनिधियों पर कार्रवाई लोकतंत्र को कुचलने का प्रयास है. पार्टी ने आरोप लगाया कि पहले ईडी का दुरुपयोग किया गया और अब सांसदों पर कार्रवाई की गई.
टीएमसी सांसद कीर्ति आज़ाद ने कहा कि वे ईडी की छापेमारी के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे. उन्होंने सवाल उठाया कि ईडी की कार्रवाई अक्सर विपक्षी नेताओं तक ही सीमित क्यों रहती है और क्या एजेंसी केवल उन्हीं के खिलाफ काम करती है, जिनके खिलाफ भाजपा राजनीतिक रूप से कमजोर पड़ती है.
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