रांची में छात्रों से संवाद करते हुए नौसेना प्रमुख ने रखा ‘विकसित भारत@2047’ का विज़न

News Saga Desk

रांची : भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने रांची में स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों से सीधा संवाद किया। ‘विकसित भारत@2047’ विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान उन्होंने छात्रों के प्रश्नों का बेबाकी से उत्तर दिया और आत्मनिर्भर भारत, राष्ट्रीय सुरक्षा तथा वैश्विक शांति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।

भाषण नहीं, संवाद को दी प्राथमिकता

टेंडर हार्ट स्कूल में आयोजित संवाद सत्र के दौरान एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि वे औपचारिक भाषण देने के बजाय छात्रों से सीधी बातचीत को अधिक महत्व देते हैं। इसी क्रम में ब्रिजफोर्ड स्कूल के छात्र नवाशीष राणा ने यह प्रश्न उठाया कि जब भारत विश्व शांति की वकालत करता है, तो हथियारों की खरीद में वृद्धि क्यों की जा रही है। इस पर एडमिरल ने स्पष्ट किया कि विश्व शांति केवल शब्दों से संभव नहीं होती, बल्कि इसके लिए देश का सक्षम और सशक्त होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब कोई राष्ट्र मजबूत होता है, तभी उसकी बात वैश्विक मंच पर सुनी जाती है। साथ ही उन्होंने भरोसा जताया कि भारत वर्ष 2030 तक रक्षा क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बन जाएगा।

राष्ट्रीय सुरक्षा पर दिया भरोसा

डोरंडा कॉलेज के छात्र रोहित कुमार द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि देश का रक्षा क्षेत्र तेज़ी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि थलसेना, वायुसेना और नौसेना के बीच बेहतर समन्वय के साथ कार्य हो रहा है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत ऐसी रणनीतिक घेराबंदी की गई थी कि दुश्मन का एक भी जहाज अपने बेस से बाहर नहीं निकल सका।

अनुशासन को बताया सशस्त्र बलों की ताकत

टॉरियन स्कूल की छात्रा सुनंदा द्वारा सेना में अनुशासन को लेकर पूछे गए प्रश्न पर एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि अनुशासन ही सशस्त्र बलों की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने बिरसा मुंडा के नारे ‘अबुआ दिशुम, अबुआ राज’ का उल्लेख करते हुए इसे आत्मनिर्भर भारत की भावना से जोड़ा।

विकसित भारत में युवाओं की निर्णायक भूमिका

इससे पूर्व सीसीएल सभागार में आयोजित ‘संवाद’ कार्यक्रम में एडमिरल त्रिपाठी ने झारखंडी परंपरा के अनुसार ‘जोहार’ कहकर अपने संबोधन की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। विकसित भारत केवल एक नारा नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भारत को शिक्षा, स्वास्थ्य और तकनीक के क्षेत्र में इतना सक्षम बनना चाहिए कि पूरी दुनिया उसे अपनी पहली पसंद माने और लोग भारत की नागरिकता प्राप्त करने की इच्छा रखें।

चित्र प्रदर्शनी का किया अवलोकन

संवाद कार्यक्रम के उपरांत एडमिरल त्रिपाठी रांची क्लब पहुंचे, जहां सांसद कला महोत्सव के अंतर्गत आयोजित चित्र प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ थीम पर बच्चों द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स की सराहना की और प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।

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