News Saga Desk
जमशेदपुर: झारखंड के जमशेदपुर से किडनैप किए गए युवा उद्यमी कैरव गांधी 13 दिन बाद सुरक्षित अपने घर लौट आए हैं। पुलिस ने 27 जनवरी 2026 की सुबह करीब 4:30 बजे उन्हें बरामद कर परिजनों को सौंप दिया। कैरव गांधी के सकुशल मिलने से परिवार और शहरवासियों ने राहत की सांस ली है।
कैरव गांधी का अपहरण 13 जनवरी की दोपहर करीब एक बजे जमशेदपुर के बिष्टुपुर थाना क्षेत्र के सीएच एरिया से किया गया था। इसके बाद से पुलिस लगातार मामले की गहन जांच में जुटी हुई थी।
10 करोड़ रुपये की फिरौती की मांग
कैरव गांधी, जमशेदपुर के चर्चित कारोबारी देवांग गांधी के पुत्र हैं। अपहरण के बाद परिजनों को 10 करोड़ रुपये की फिरौती के लिए कई बार फोन कॉल आए थे। बताया जा रहा है कि ये कॉल इंडोनेशिया से किए गए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड की पुलिस महानिदेशक तदाशा मिश्रा स्वयं रविवार को जमशेदपुर पहुंचीं और घटनास्थल का निरीक्षण कर अब तक जुटाए गए साक्ष्यों की समीक्षा की।
राजनीतिक दबाव में भी रही पुलिस
हाई प्रोफाइल किडनैपिंग मामले को लेकर पुलिस पर राजनीतिक दबाव भी बना रहा। 23 जनवरी 2026 को झारखंड बीजेपी अध्यक्ष आदित्य साहू जमशेदपुर पहुंचे और कैरव गांधी के परिजनों से मुलाकात की थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि कैरव गांधी की बरामदगी नहीं होती है तो पार्टी आंदोलन करेगी। वहीं, पश्चिमी जमशेदपुर से जदयू विधायक सरयू राय ने 15 जनवरी को झारखंड की पुलिस महानिदेशक तदाशा मिश्रा और जमशेदपुर के एसएसपी पीयूष पांडेय से इस मामले को लेकर बातचीत की थी।
बिहार और पश्चिम बंगाल तक चली जांच
कैरव गांधी की तलाश के लिए पुलिस की टीमें बिहार और पश्चिम बंगाल में लगातार छापेमारी कर रही थीं। राष्ट्रीय राजमार्गों और राज्य की प्रमुख सड़कों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले गए, जिनसे अपहरण से जुड़े अहम सुराग मिलने की बात कही जा रही है। हालांकि, कैरव गांधी की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने आधिकारिक तौर पर ज्यादा जानकारी साझा नहीं की है।
पुलिस अब पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ते हुए अपहरण में शामिल आरोपियों तक पहुंचने की दिशा में आगे की कार्रवाई कर रही है।
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