News Saga Desk
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दावोस और लंदन प्रवास के बाद मंगलवार को 12 दिनों के अंतराल पर राजधानी रांची लौट आए। बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान उनके साथ उनकी पत्नी कल्पना सोरेन, मुख्य सचिव अविनाश कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने विदेश दौरे के दौरान स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भाग लिया। इसके बाद 22 जनवरी से वे लंदन प्रवास पर रहे, जहां उन्होंने विभिन्न कार्यक्रमों में शिरकत की। मुख्यमंत्री 26 जनवरी को लंदन में आयोजित भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में भी शामिल हुए।
वैश्विक मंच पर झारखंड की पहली मजबूत उपस्थिति
रांची लौटने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि विदेश यात्रा के दौरान उन्होंने झारखंड की बातों को वैश्विक स्तर पर मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब झारखंड ने किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। इससे राज्य के विकास के नए रास्ते खुलेंगे और निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दावोस के वैश्विक मंच से मिले अनुभवों के आधार पर सरकार राज्य के जनमानस के हित में कार्य करेगी। जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के साथ-साथ राज्य की अपार संभावनाओं को नया आयाम देने की दिशा में पहल की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर भविष्य और शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर सृजित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
सोशल मीडिया के जरिए साझा किए विचार
रांची लौटते ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, दावोस और यूनाइटेड किंगडम में युवा झारखंड की समृद्ध विरासत, अपार संभावनाओं और प्रकृति के साथ संतुलित विकास के संकल्प को दुनिया के सामने रखने के बाद वे अपने लोगों के बीच लौटे हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया ने देखा है कि युवा झारखंड और यहां के लोगों में अभूतपूर्व क्षमता है और अब सभी को मिलकर इस युवा राज्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाना है।

महान विभूतियों के विचारों से मिली प्रेरणा
एक अन्य पोस्ट में मुख्यमंत्री ने अपने यूके दौरे से जुड़ी एक तस्वीर साझा करते हुए कहा कि यह यात्रा उनके लिए बेहद आत्मीय और स्मरणीय रही। विभिन्न व्यापारिक बैठकों, निवेश संवादों और नीतिगत चर्चाओं के बीच उन्हें उन महान व्यक्तित्वों के जीवन और विचारों को समझने का अवसर मिला, जिन्होंने भारत की आत्मा और दिशा को आकार दिया। इनमें मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर, इंदिरा गांधी और डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन विभूतियों के विचार विदेश की धरती पर खड़े होकर झारखंड और भारत के प्रति उनकी जिम्मेदारियों को और गहराई से समझने का बोध कराते हैं।
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