News Saga Desk
नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम ट्रेड डील को लेकर तस्वीर अब काफी हद तक स्पष्ट हो गई है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि इस समझौते के तहत अमेरिका से आयात होने वाले कुछ जरूरी उत्पादों, विशेषकर दवाओं और मेडिकल उपकरणों पर शून्य प्रतिशत आयात शुल्क लगाने का निर्णय लिया गया है। इस कदम से मरीजों को सस्ती चिकित्सा सुविधा मिलने के साथ दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। इस अंतरिम समझौते को मार्च 2026 के मध्य तक कानूनी रूप दिया जा सकता है।
गंभीर बीमारियों के इलाज में राहत
मंत्री के अनुसार, कैंसर, हृदय रोग और न्यूरोलॉजिकल उपचार में इस्तेमाल होने वाली चुनिंदा दवाओं पर पूरी तरह टैरिफ समाप्त किया जाएगा। इसके अलावा कुछ ऐसे मेडिकल उपकरणों को भी शुल्क में छूट देने पर विचार किया जा रहा है, जिनका देश में उत्पादन शुरू तो हो चुका है, लेकिन उनकी उपलब्धता अभी सीमित है। सरकार का मानना है कि इससे मरीजों को बेहतर इलाज कम लागत पर मिल सकेगा, जबकि घरेलू उद्योग पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
केमिकल, ड्राय फ्रूट और अन्य उत्पादों को भी राहत
भारत अमेरिका से आयात होने वाले ऑर्गेनिक और इनऑर्गेनिक केमिकल्स पर भी शुल्क में रियायत देने की योजना बना रहा है। शराब, कॉस्मेटिक्स और कुछ मेडिकल डिवाइसेज पर पहले ही ड्यूटी में छूट दी जा चुकी है। इसके अलावा पिस्ता और बादाम जैसे ड्राय फ्रूट्स पर चरणबद्ध तरीके से टैरिफ समाप्त करने पर विचार किया जा रहा है। डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स जैसे उत्पादों के आयात को भी मंजूरी दी जाएगी, जिससे पशुपालन क्षेत्र को लाभ मिल सकता है।
500 अरब डॉलर के आयात की तैयारी
इस प्रस्तावित समझौते के तहत भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर के ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके पुर्जे, कीमती धातुएं, तकनीकी उत्पाद और कोकिंग कोल खरीदने की योजना बना रहा है। साथ ही आईसीटी उत्पादों और मेडिकल डिवाइसेज के आयात से जुड़े नियमों को भी सरल बनाया जाएगा।
पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि जीरो टैरिफ का निर्णय देश की उत्पादन क्षमता और घरेलू उद्योगों के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि स्थानीय उद्योगों को किसी प्रकार का नुकसान न हो।
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