8 दिन में तीसरी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, CNG भी महंगी; जानिए आम आदमी और अर्थव्यवस्था पर कितना पड़ेगा असर

News Saga Desk

नई दिल्ली। आम उपभोक्ताओं को महंगाई का एक और झटका लगा है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने आठ दिनों के भीतर तीसरी बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। ताजा संशोधन के तहत पेट्रोल 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया है। इसके साथ ही सीएनजी की कीमतों में भी 1 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि की गई है।

नई दरें शनिवार सुबह 6 बजे से लागू हो गईं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत बढ़कर 99.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल 92.49 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। इससे पहले तेल कंपनियां 15 मई और 19 मई को भी ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी कर चुकी हैं।

महानगरों में कितना बढ़ा ईंधन का दाम?

ताजा बढ़ोतरी के बाद देश के प्रमुख महानगरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उल्लेखनीय इजाफा दर्ज किया गया है।

कोलकाता में पेट्रोल 94 पैसे बढ़कर 110.64 रुपये प्रति लीटर हो गया, जबकि डीजल 95 पैसे की बढ़ोतरी के साथ 97.02 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया।

मुंबई में पेट्रोल 90 पैसे महंगा होकर 108.49 रुपये प्रति लीटर और डीजल 94 पैसे बढ़कर 95.02 रुपये प्रति लीटर हो गया।

चेन्नई में पेट्रोल 82 पैसे की बढ़ोतरी के बाद 105.33 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87 पैसे बढ़कर 96.98 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया।

वहीं दिल्ली में सीएनजी की कीमत बढ़कर 81.09 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है।

क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?

भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ता है।

विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिका-ईरान के बीच टकराव की स्थिति और स्ट्रेट ऑफ हार्मुज से तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंकाओं ने वैश्विक बाजार में कच्चे तेल को महंगा कर दिया है। इससे तेल कंपनियों की लागत बढ़ी है, जिसके चलते घरेलू बाजार में भी कीमतों में वृद्धि की गई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का हाल

वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं। दूसरी ओर WTI क्रूड कुछ नरमी के बावजूद करीब 96.60 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। वहीं भारतीय बास्केट (Indian Basket) में कच्चे तेल की औसत कीमत लगभग 109.7 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई है।

आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?

  1. महंगाई बढ़ने की आशंका

डीजल का उपयोग मुख्य रूप से ट्रक, बसों और मालवाहक वाहनों में होता है। डीजल महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ जाती है, जिसका असर खाद्यान्न, फल, सब्जियां, दूध और अन्य दैनिक उपभोग की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है। ऐसे में खुदरा महंगाई में बढ़ोतरी की आशंका बढ़ जाती है।

  1. मध्यम वर्ग का घरेलू बजट बिगड़ेगा

निजी वाहन इस्तेमाल करने वाले लोगों का मासिक ईंधन खर्च बढ़ जाएगा। रोजाना ऑफिस आने-जाने वालों और लंबी दूरी तय करने वाले उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर पड़ेगा। बढ़ती महंगाई के दबाव में ब्याज दरें बढ़ने की स्थिति बनी तो होम लोन और वाहन ऋण की ईएमआई भी प्रभावित हो सकती है।

  1. उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ेगी

कई उद्योगों में मशीनें, जनरेटर और परिवहन व्यवस्था ईंधन पर निर्भर होती हैं। पेट्रोलियम उत्पाद महंगे होने से उत्पादन लागत बढ़ती है, जिसका बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ता है। पेंट, प्लास्टिक, रसायन और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल सकती है।

  1. अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव

भारत अपनी कुल तेल आवश्यकता का 80 प्रतिशत से अधिक आयात करता है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने पर आयात बिल बढ़ता है, जिससे विदेशी मुद्रा पर दबाव पड़ता है। इससे रुपये की विनिमय दर कमजोर हो सकती है और सरकार व तेल कंपनियों का वित्तीय बोझ भी बढ़ सकता है।

आगे क्या?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का दौर जारी रहा तो आने वाले दिनों में ईंधन कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। ऐसे में पेट्रोल, डीजल और परिवहन लागत से जुड़ी वस्तुओं की कीमतों में और बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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