पश्चिम बंगाल सरकार ने 10 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया। मुख्यमंत्री ने अरण्य सप्ताह 2026 में वनों की कटाई पर चिंता जताई और पर्यावरण संरक्षण का आह्वान किया।
News Saga Desk
पश्चिम बंगाल में 10 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य राज्य सरकार की पर्यावरण संरक्षण रणनीति का अहम हिस्सा बन गया है। मंगलवार को साल्टलेक स्थित वनबितान में ‘अरण्य सप्ताह 2026’ का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने वृक्षारोपण अभियान की शुरुआत की और राज्यभर में व्यापक स्तर पर हरित क्षेत्र बढ़ाने का संकल्प दोहराया। इस दौरान उन्होंने वनों की कटाई और पर्यावरणीय क्षरण को लेकर पूर्ववर्ती सरकार पर तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले जंगलों को भारी नुकसान पहुंचा और अब समय आ गया है कि राज्य में बड़े पैमाने पर वन सृजन किया जाए।
अरण्य सप्ताह 2026 से शुरू हुआ अभियान
‘अरण्य सप्ताह 2026’ के उद्घाटन अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्वयं पौधारोपण किया और लोगों से भी इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में 10 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सामूहिक जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वृक्षारोपण के साथ-साथ पौधों की नियमित देखभाल भी उतनी ही जरूरी है। यदि लगाए गए पौधों की दो से तीन वर्षों तक निगरानी नहीं की जाएगी, तो अभियान का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकेगा।
वनों की स्थिति पर जताई चिंता
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी कार्यों और चुनावी दौरों के दौरान हेलीकॉप्टर से राज्य के ऊपर से गुजरते समय उन्हें जंगलों की घटती हरियाली स्पष्ट दिखाई देती है। उन्होंने विशेष रूप से झाड़ग्राम, बांकुड़ा, पुरुलिया और तराई-डुआर्स क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां के घने जंगल पहले जैसे नहीं रहे।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले शासनकाल में वन संपदा की उपेक्षा हुई, जिसके कारण पर्यावरण और जैव विविधता दोनों को नुकसान पहुंचा। उनके अनुसार, अब पश्चिम बंगाल में 10 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य इस कमी को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
निजी संस्थानों पर भी उठाए सवाल
मुख्यमंत्री ने कई निजी और व्यावसायिक संस्थानों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भवन निर्माण की अनुमति लेते समय कई संस्थानों ने अपनी भूमि के एक-तिहाई हिस्से में हरित क्षेत्र विकसित करने का वादा किया था, लेकिन अधिकांश मामलों में इसका पालन नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि राज्य में तेजी से “कंक्रीट के जंगल” बढ़ रहे हैं, जिससे पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने संबंधित एजेंसियों से नियमों का सख्ती से पालन कराने पर भी जोर दिया।
10 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य क्यों महत्वपूर्ण?
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि पश्चिम बंगाल में 10 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य इस वर्ष के लिए निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि पहले विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 7.20 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 10 करोड़ कर दिया गया।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में 26 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा जा सकता है, तो पश्चिम बंगाल भी अपना लक्ष्य पूरा करने में सक्षम है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने लोकसभा क्षेत्र में इस वर्ष 1.20 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
पर्यावरण संरक्षण और जलवायु पर प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े स्तर पर वृक्षारोपण से वायु गुणवत्ता में सुधार, जैव विविधता का संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मदद मिल सकती है। मुख्यमंत्री ने भी कहा कि वन क्षेत्र बढ़ने से प्राकृतिक संसाधनों और वन्यजीवों की सुरक्षा मजबूत होगी।
उन्होंने हाल के दिनों में राज्य में बढ़ी आकाशीय बिजली की घटनाओं का उल्लेख करते हुए अधिक से अधिक नारियल के पेड़ लगाने की सलाह दी। उनके अनुसार, इस संबंध में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं, ताकि बिजली गिरने से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
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आधिकारिक बयान और सार्वजनिक जानकारी
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि केवल पौधे लगाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण सुनिश्चित करना भी जरूरी है। उन्होंने सभी सरकारी विभागों, स्थानीय निकायों, निजी संस्थानों और आम नागरिकों से इस अभियान में सक्रिय सहयोग की अपील की।
राज्य सरकार के अनुसार, पश्चिम बंगाल में 10 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। अभियान के तहत विभिन्न जिलों में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और पौधों की निगरानी की भी व्यवस्था की जाएगी।
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