General Manoj Pande ने कोलकाता सेमिनार में सैन्य आधुनिकीकरण, AI, ड्रोन, साइबर युद्ध और आर्थिक सुरक्षा को भारत की रणनीतिक प्राथमिकता बताया।
News Saga Desk
कोलकाता। General Manoj Pande ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक मजबूती भारत के भविष्य की दो सबसे महत्वपूर्ण आधारशिलाएं हैं। पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि हाल के वर्षों में भारत ने अपनी सामरिक क्षमता में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए रक्षा तैयारियों को लगातार मजबूत बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सैन्य अभियान भविष्य के लिए नई सीख देता है और उन अनुभवों के आधार पर सशस्त्र बलों की रणनीति को लगातार बेहतर बनाया जाना चाहिए।
कोलकाता में राष्ट्रीय सुरक्षा पर आयोजित हुआ सेमिनार
General Manoj Pande ने कोलकाता के फेयरफील्ड बाय मैरियट में व्याना जियो-इकोनॉमिक फोरम (VGEF) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार “उभरती वैश्विक व्यवस्था में राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक लचीलापन : विकसित भारत की सामरिक प्राथमिकताएं” के समापन सत्र को संबोधित किया।
कार्यक्रम में पूर्वी कमान के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल गंभीर सिंह, ब्रिगेडियर आदित्य सहाय सहित कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, रणनीतिक विशेषज्ञ, अर्थशास्त्री, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और पूंजी बाजार से जुड़े विशेषज्ञ मौजूद रहे।
भविष्य के युद्धों में AI, ड्रोन और साइबर क्षमता होगी निर्णायक
अपने संबोधन में General Manoj Pande ने कहा कि आज युद्ध की प्रकृति तेजी से बदल रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ड्रोन, साइबर युद्ध, अंतरिक्ष आधारित निगरानी प्रणाली और अत्याधुनिक हथियार आधुनिक युद्ध का स्वरूप बदल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्ध केवल जमीन, समुद्र और वायु तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि साइबर और अंतरिक्ष क्षेत्र भी समान रूप से महत्वपूर्ण होंगे। इसलिए भारतीय सशस्त्र बलों को इन सभी क्षेत्रों में एकीकृत क्षमता विकसित करनी होगी।
सैनिकों के प्रशिक्षण और आधुनिक हथियारों पर दिया जोर
पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय सेना को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए आधुनिक हथियारों, तकनीकी दक्षता, बेहतर प्रशिक्षण और तेज निर्णय लेने की क्षमता पर विशेष ध्यान देना होगा।
उन्होंने कहा कि नई तकनीकों को सैन्य अभियानों का अभिन्न हिस्सा बनाना आवश्यक है, ताकि किसी भी प्रकार के खतरे का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।
सैनिकों के मूल्यों को बताया सबसे बड़ी ताकत
General Manoj Pande ने कहा कि आधुनिक तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है, लेकिन किसी भी सैनिक की सबसे बड़ी ताकत उसका अनुशासन, राष्ट्र के प्रति समर्पण, साहस, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा होती है।

उन्होंने कहा कि यही मूल्य भारतीय सेना की पहचान हैं और भविष्य में भी इसकी सबसे बड़ी शक्ति बने रहेंगे।
विशेषज्ञों ने रक्षा आत्मनिर्भरता और रणनीतिक क्षमता पर रखे विचार
सेमिनार के पहले तकनीकी सत्र में लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला, लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रत साहा, लेफ्टिनेंट जनरल दुष्यंत सिंह और एयर मार्शल नागेश कपूर ने भारत की रक्षा तैयारियों, सामरिक प्रतिरोध क्षमता, सैन्य आधुनिकीकरण, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और नई तकनीकों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।
वक्ताओं ने कहा कि भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के साथ-साथ अपनी सैन्य क्षमताओं का निरंतर विस्तार करना होगा।
आर्थिक सुरक्षा को बताया राष्ट्रीय सुरक्षा की मजबूत नींव
दूसरे सत्र में करण दत्ता, डॉ. अजीत रानाडे, सुगत घोष दस्तीदार और सिद्धार्थ श्रीवास्तव ने आर्थिक सुरक्षा, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा विनिर्माण, रक्षा निर्यात और तकनीकी प्रतिस्पर्धा जैसे विषयों पर विचार रखे।
विशेषज्ञों ने कहा कि मजबूत अर्थव्यवस्था के बिना किसी भी देश की राष्ट्रीय सुरक्षा लंबे समय तक मजबूत नहीं रह सकती। इसलिए रक्षा और आर्थिक विकास को समान प्राथमिकता देना आवश्यक है।
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निजी उद्योगों की बढ़ती भूमिका पर भी चर्चा
सेमिनार के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत में रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में निजी उद्योगों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। इससे न केवल देश की रक्षा आवश्यकताओं की पूर्ति होगी, बल्कि रक्षा निर्यात बढ़ने से भारतीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
कार्यक्रम के अंत में व्याना जियो-इकोनॉमिक फोरम के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) तरुण कुमार आइच ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक शक्ति एक-दूसरे की पूरक हैं। उन्होंने बताया कि भविष्य में भी इस मंच के माध्यम से रक्षा, अर्थव्यवस्था और रणनीतिक मामलों पर नियमित राष्ट्रीय स्तर के संवाद आयोजित किए जाएंगे।
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