सरायकेला-खरसावां में सोशल मीडिया के जरिए करोड़ों रुपये और 10% कमीशन का लालच देकर साइबर ठगी की साजिश पुलिस ने नाकाम कर दी। 40-45 लोगों को संभावित फ्रॉड से बचाया गया।
सरायकेला-खरसावां में एक बड़े साइबर फ्रॉड की साजिश को पुलिस ने समय रहते विफल कर दिया। सोशल मीडिया के जरिए करोड़ों रुपये के लेनदेन और 10 प्रतिशत कमीशन का लालच देकर लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश कर रहे संदिग्ध साइबर गिरोह की योजना को आदित्यपुर थाना पुलिस ने नाकाम कर दिया। पुलिस अधीक्षक (SP) के निर्देश पर की गई इस कार्रवाई में करीब 40 से 45 लोगों को संभावित साइबर ठगी का शिकार होने से बचा लिया गया। पुलिस का मानना है कि यदि समय पर कार्रवाई नहीं होती तो यह मामला करोड़ों रुपये के अवैध वित्तीय लेनदेन और बड़े साइबर अपराध का रूप ले सकता था।

सोशल मीडिया के जरिए रचा जा रहा था जाल
प्राथमिक जानकारी के अनुसार, संदिग्ध गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों से संपर्क कर उन्हें करोड़ों रुपये के ट्रांजैक्शन का हिस्सा बनाने का झांसा देता था। बदले में 10 प्रतिशत तक कमीशन देने का वादा किया जाता था।
गिरोह लोगों को विश्वास में लेने के लिए उन्हें होटल में ठहराने की व्यवस्था करता था और पूरी प्रक्रिया को गोपनीय रखने का दबाव भी बनाता था। इस तरह लोगों को यह विश्वास दिलाया जाता था कि वे किसी वैध और लाभदायक वित्तीय गतिविधि का हिस्सा बन रहे हैं।
बैंक खातों की जानकारी हासिल करने की थी कोशिश
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह लोगों से उनके बैंक खातों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी हासिल करने का प्रयास कर रहा था। इसके अलावा मोबाइल पर भेजे गए लिंक खोलने और डिजिटल गतिविधियों से जुड़े रिकॉर्ड हटाने के लिए भी कहा जाता था।
पुलिस को आशंका है कि यह पूरा नेटवर्क किसी बड़े साइबर फ्रॉड या अवैध वित्तीय लेनदेन से जुड़ा हो सकता था। यदि लोग इनके झांसे में आ जाते, तो उनके बैंक खाते साइबर अपराध में इस्तेमाल किए जा सकते थे और उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ-साथ कानूनी परेशानियों का भी सामना करना पड़ सकता था।
पुलिस की तत्परता से बची बड़ी ठगी
मामले की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक ने तत्काल आदित्यपुर थाना पुलिस को कार्रवाई के निर्देश दिए। थाना प्रभारी अंजनी कुमार सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए संभावित रूप से गिरोह के संपर्क में आए करीब 40 से 45 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।
पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से करोड़ों रुपये के संभावित साइबर अपराध को अंजाम तक पहुंचने से पहले ही रोक दिया गया। बचाए गए लोगों ने थाना प्रभारी अंजनी कुमार सिंह और पूरी पुलिस टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समय पर कार्रवाई नहीं होती तो वे बड़ी ठगी का शिकार हो सकते थे।
आसान कमाई का लालच बन रहा बड़ा खतरा
पुलिस ने कहा कि आजकल साइबर अपराधी सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को आसान कमाई, भारी कमीशन और कम समय में करोड़पति बनने जैसे झूठे वादों से फंसाने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे मामलों में लोग लालच में आकर अपनी निजी और बैंकिंग जानकारी साझा कर देते हैं, जिसका बाद में गलत इस्तेमाल किया जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अनजान व्यक्ति या संस्था के ऐसे प्रस्तावों पर भरोसा करना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। किसी भी वित्तीय लेनदेन से पहले उसकी सत्यता की जांच करना जरूरी है। देशभर में साइबर अपराध के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप और फर्जी निवेश योजनाओं के जरिए लोगों को बड़े मुनाफे का लालच देकर ठगी की घटनाएं सामने आ रही हैं।
झारखंड में भी पुलिस समय-समय पर ऐसे गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई करती रही है। सरायकेला-खरसावां का यह मामला भी इसी तरह की एक संगठित साइबर साजिश से जुड़ा माना जा रहा है। पुलिस की समय पर कार्रवाई से दर्जनों लोग संभावित आर्थिक नुकसान और साइबर अपराध में फंसने से बच गए। साथ ही करोड़ों रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की आशंका पर भी समय रहते रोक लग गई। इस कार्रवाई से लोगों में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और ऐसे गिरोहों के खिलाफ सतर्क रहने का संदेश जाएगा।
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पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर करोड़ों रुपये कमाने, भारी कमीशन दिलाने या कम समय में बड़ी रकम कमाने का दावा करने वाले किसी भी प्रस्ताव पर विश्वास न करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर पुलिस को दें। पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि अपने बैंक खाते, एटीएम/डेबिट कार्ड, ओटीपी, पासवर्ड, यूपीआई पिन या किसी भी वित्तीय जानकारी को किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें। मोबाइल पर प्राप्त संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें। यदि किसी प्रकार का संदेह हो तो तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।
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