सोनिया गांधी के 1980 की मतदाता सूची में नाम दर्ज होने से जुड़े मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पुराना आदेश रद्द कर दिया है। अब 29 सितंबर को मजिस्ट्रेट कोर्ट में फिर सुनवाई होगी।
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी के वर्ष 1980 की मतदाता सूची से जुड़े एक पुराने मामले में दिल्ली की अदालत ने नया मोड़ दे दिया है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोनिया गांधी के खिलाफ दायर शिकायत को खारिज करने वाले मजिस्ट्रेट कोर्ट के पुराने आदेश को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने मामले को पुनर्विचार के लिए वापस मजिस्ट्रेट कोर्ट भेजते हुए आगामी 29 सितंबर को सुनवाई की अगली तारीख तय की है।

क्या है 1980 की वोटर लिस्ट से जुड़ा पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 1980 की नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र की मतदाता सूची में सोनिया गांधी का नाम दर्ज होने से जुड़ा हुआ है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि 1980 में सोनिया गांधी भारत की नागरिक नहीं थीं, इसके बावजूद उनका नाम मतदाता सूची में शामिल किया गया था। याचिका में इसे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत गलत घोषणा और फर्जीवाड़े का मामला बताते हुए दिल्ली पुलिस को एफआईआर (FIR) दर्ज कर जांच का आदेश देने की मांग की गई थी।
इससे पहले सितंबर 2025 में मजिस्ट्रेट अदालत ने इस शिकायत को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि शिकायतकर्ता ने प्रामाणिक प्रति के बजाय फोटोकॉपी पर भरोसा किया है और आपराधिक तत्वों के पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए हैं। साथ ही मजिस्ट्रेट कोर्ट ने माना था कि नागरिकता से जुड़े विषय केंद्र सरकार और मतदाता सूची के मुद्दे चुनाव आयोग के क्षेत्राधिकार में आते हैं।
विशेष अदालत ने क्यों पलटा पुराना आदेश?
राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज विशाल गोगने ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस फैसले को समीक्षा के दौरान “नॉन-स्पीकिंग” (पर्याप्त तर्कों व कारणों का अभाव वाला) करार दिया। विशेष अदालत ने स्पष्ट किया कि मजिस्ट्रेट ने शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों पर गहराई से विचार नहीं किया।
इसके अलावा, अदालत ने यह भी पाया कि इस मामले में दिल्ली पुलिस के जांच अधिकारी (IO) को अपना जवाब और विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया था। इन्हीं कमियों के आधार पर स्पेशल जज ने खारिज करने के आदेश को रद्द करते हुए मामले को वापस मजिस्ट्रेट कोर्ट को सौंप दिया।
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