झारखंड में सड़क दुर्घटनाएं: 79.2% हादसे गंभीर श्रेणी में, मिजोरम और बिहार के बाद देश में तीसरा स्थान

NEWS SAGA DESK

सड़क परिवहन मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में झारखंड में 79.2% सड़क दुर्घटनाएं गंभीर रहीं, जिससे राज्य देश में तीसरे स्थान पर है। सड़क सुरक्षा में सुधार की मांग तेज।

झारखंड में सड़क दुर्घटनाओं की गंभीरता लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा जारी नवीनतम रिपोर्ट, ‘Road Accidents in India 2023-24′, के आंकड़े राज्य में सड़क सुरक्षा की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में होने वाली अधिकांश सड़क दुर्घटनाएं अत्यधिक गंभीर प्रकृति की हैं, जिसके कारण राज्य वर्ष 2023 और 2024, लगातार दो वर्षों तक, हादसों की गंभीरता के मामले में पूरे देश में तीसरे स्थान पर बना हुआ है।

Road Accidents in India 2023-24',

दुर्घटनाओं की गंभीरता: चिंताजनक आंकड़े

मंत्रालय की रिपोर्ट स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि झारखंड में दुर्घटनाओं की मारकता दर (Fatality or Severity Rate) बहुत अधिक है। वर्ष 2023 में, राज्य में होने वाले कुल सड़क हादसों में से 78.5 प्रतिशत दुर्घटनाएं गंभीर श्रेणी की थीं। वर्ष 2024 में स्थिति में सुधार होने के बजाय गिरावट दर्ज की गई, और यह आंकड़ा बढ़कर 79.2 प्रतिशत हो गया।

दुर्घटनाओं की गंभीरता के राष्ट्रीय सूचकांक में वर्ष 2024 में पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम 93.2 प्रतिशत के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि पड़ोसी राज्य बिहार 80.5 प्रतिशत गंभीर हादसों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। इसके ठीक बाद झारखंड का नंबर आता है।रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में सड़क दुर्घटनाओं के कारण जान गंवाने वालों की संख्या में भी वृद्धि दर्ज की गई है। पूरे भारत में जहां वर्ष 2023 में सड़क हादसों में 1,72,890 लोगों की अकाल मृत्यु हुई थी, वहीं 2024 में यह हृदय विदारक आंकड़ा बढ़कर 1,77,175 हो गया।

सड़क दुर्घटनाओं के जनसांख्यिकीय (Demographic) आंकड़े सबसे अधिक परेशान करने वाले हैं, क्योंकि इसमें जान गंवाने वालों में सबसे बड़ा वर्ग युवाओं का है। 2023-24 की रिपोर्ट के विस्तृत विश्लेषण से पता चलता है कि:

  • 18 वर्ष से कम (नाबालिग): 5.7 प्रतिशत
  • 18 से 25 वर्ष (युवा वर्ग): 19.3 प्रतिशत
  • 25 से 35 वर्ष (युवा पेशेवर): 23.2 प्रतिशत
  • 35 से 45 वर्ष: 21.6 प्रतिशत
  • 45 से 60 वर्ष: 17.2 प्रतिशत

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि 18 से 45 वर्ष के आयु वर्ग के लोग, जो देश और राज्य की मुख्य कार्यशील आबादी (Working Population) हैं, हादसों का सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं।

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