News Saga Desk
रांची में प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग के चेयरमैन सतीश पॉल मुंजनी ने पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन पर आदिवासी हितों को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पेसा नियमावली को लेकर चंपाई सोरेन का बयान तथ्यों से परे है और इससे आदिवासी समाज के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है।
सतीश पॉल मुंजनी ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने पेसा नियमावली आदिवासी स्वशासन को सशक्त करने के उद्देश्य से तैयार की है, न कि उसे कमजोर करने के लिए। उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर खुली बहस के लिए पूरी तरह तैयार है और आदिवासी समाज को गुमराह करने की हर कोशिश नाकाम होगी।
उन्होंने बताया कि पेसा अधिनियम में आदिवासी समाज की रूढ़िवादी विधियों, सामाजिक और धार्मिक परंपराओं को पूर्ण मान्यता दी गई है। नियमावली में इन परंपराओं को कमजोर करने का कोई प्रावधान नहीं है। जानबूझकर शब्दों की गलत व्याख्या कर यह प्रचार किया जा रहा है कि सरकार परंपराओं को खत्म करना चाहती है, जो पूरी तरह भ्रामक है।
मुंजनी ने कहा कि प्रशासनिक ढांचे में जवाबदेही तय करने का उद्देश्य योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। डीसी को जिम्मेदारी देना ग्रामसभा को कमजोर करना नहीं, बल्कि ग्रामसभा के फैसलों को जमीन पर लागू कराने की व्यवस्था है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार हर पहलू की कानूनी समीक्षा कर रही है और बिना ग्रामसभा की प्रक्रिया पूरी किए किसी भी परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। पेसा के तहत ग्रामसभा को सामुदायिक संसाधनों के संरक्षण, प्रबंधन और उपयोग में निर्णायक भूमिका दी गई है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि अफवाह फैलाकर आंदोलन भड़काना आदिवासी हित नहीं, बल्कि राजनीतिक स्वार्थ का हिस्सा है।
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