अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सोना-चांदी में जबरदस्त उछाल, जानिए कितने बढ़े भाव

News Saga Desk

वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी डॉलर में आई कमजोरी के बीच सोमवार को भारतीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमती धातुओं की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना और चांदी दोनों ही रिकॉर्ड स्तर की ओर बढ़ते नजर आए।

बाजार का ताजा हाल

MCX पर अप्रैल वायदा सोने की कीमत में 1.83 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह 1,59,749 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। इंट्रा-डे कारोबार के दौरान सोना करीब 2 प्रतिशत तक उछला।

वहीं चांदी ने अधिक आक्रामक रुख अपनाया। मार्च वायदा चांदी 5.10 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,65,836 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। दिन के शुरुआती सत्र में इसमें 6 प्रतिशत तक की तेजी देखी गई। शुक्रवार के बंद भाव 2,52,836 रुपये प्रति किलोग्राम के मुकाबले यह लगभग 13,000 रुपये की सीधी छलांग है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के अनुसार, इंट्रा-डे में चांदी में 6 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई।

तेजी के प्रमुख कारण

अमेरिका-ईरान तनाव:
विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव इस तेजी का मुख्य कारण है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को “सार्थक समझौते” के लिए दी गई 10 दिन की समय-सीमा समाप्ति की ओर है। हालांकि ईरान ने प्रतिबंधों में राहत के बदले अपने परमाणु कार्यक्रम पर रियायत के संकेत दिए हैं, लेकिन संभावित टकराव की आशंका ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में सोने की ओर आकर्षित किया है।

डॉलर में गिरावट:
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ के बड़े हिस्से को निरस्त किए जाने के बाद डॉलर इंडेक्स में गिरावट आई है। डॉलर कमजोर होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है, जिससे इसकी मांग बढ़ती है और कीमतों को समर्थन मिलता है।

चांदी की वैश्विक किल्लत:
विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी की वैश्विक आपूर्ति में कमी देखी जा रही है। कॉमेक्स जैसे बड़े भंडारण केंद्रों में इन्वेंट्री घटने और चीन के बाजार बंद रहने से मांग-आपूर्ति का संतुलन प्रभावित हुआ है, जिससे कीमतों में तेजी आई है।

अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सुस्ती:
अमेरिका की जीडीपी वृद्धि दर चौथी तिमाही में घटकर 1.4 प्रतिशत रह गई है, जो पिछली तिमाहियों (4.4 प्रतिशत और 3.8 प्रतिशत) की तुलना में काफी कम है। आर्थिक सुस्ती की आशंका ने भी सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग को बढ़ाया है।

आगे की राह

अब बाजार की नजर अमेरिका के फैक्ट्री ऑर्डर्स, उपभोक्ता विश्वास सूचकांक और प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) के आंकड़ों पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक भू-राजनीतिक स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। फिलहाल सोने के लिए 1,60,600 रुपये और चांदी के लिए 2,63,620 रुपये प्रमुख प्रतिरोध स्तर माने जा रहे हैं।

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