News Saga Desk
बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन सदन राजनीति, परंपरा और उत्साह से भर उठा। सोमवार को बीजेपी के वरिष्ठ नेता प्रेम कुमार निर्विरोध विधानसभा अध्यक्ष चुने गए। उनके चयन के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव एक साथ उन्हें अध्यक्ष की कुर्सी तक छोड़ने पहुंचे—यह दृश्य राजनीतिक सौहार्द का अनोखा उदाहरण बना। सदन में भारत माता की जय और जय श्रीराम के नारों से माहौल और भी ऊर्जावान हो गया।
नीतीश कुमार ने किया सम्मान का आह्वान
नए अध्यक्ष को बधाई देते हुए नीतीश कुमार ने उनके अनुभव और कामकाज की प्रशंसा की। उन्होंने सभी विधायकों से खड़े होकर अध्यक्ष का अभिवादन करने की अपील की, जिसे पूरे सदन ने एकमत से स्वीकार किया।
शपथ ग्रहण में दिखा भाषाई रंग
दिन की शुरुआत शपथ ग्रहण प्रक्रिया से हुई। पहले दिन शपथ न ले पाने वाले सात विधायकों में से पांच ने सोमवार को शपथ ली। सबसे पहले मंत्री मदन सहनी ने शपथ ग्रहण की।
लेकिन जैसे ही लौरिया से बीजेपी विधायक विनय बिहारी का नाम आया, सदन में हलचल बढ़ गई। उन्होंने प्रोटेम स्पीकर नरेंद्र नारायण यादव से पूछा कि क्या वे भोजपुरी में शपथ ले सकते हैं। अनुमति मिलते ही विनय बिहारी ने शपथ से पहले भोजपुरी की गाथा सुनानी शुरू कर दी।
स्पीकर ने तुरंत उन्हें टोकते हुए कहा—“जो दिया गया है, वही पढ़िए।”
इस पर विनय बिहारी बोले—“शपथ तो ले लेंगे, लेकिन भोजपुरी कविता नहीं पढ़ सकता क्या? भोजपुरी 32 जिलों की भाषा है, इसे सम्मान मिलना चाहिए। मैं गायक बनकर विधायक बना हूं।”
हालांकि, कुछ सदस्यों की आपत्ति के बाद उन्होंने अंत में हिंदी में ही शपथ ली।
संस्कृत में गूंजी शपथ
विनय बिहारी के बाद जीवेश मिश्रा ने संस्कृत में शपथ लेकर सदन में एक अलग ही सांस्कृतिक वातावरण बना दिया। वहीं, कुचायकोट से अमरेंद्र कुमार पांडेय और मोकामा से अनंत सिंह दूसरे दिन भी सदन में अनुपस्थित रहे, जिसके कारण दोनों विधायकों की शपथ लंबित रह गई।
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