News Saga Desk
पटना: कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा बनाए रखना अब पहली प्राथमिकता बन गई है। बिहार पुलिस ने इस दिशा में सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि उत्पीड़न की हर शिकायत पर कानून के अनुसार कार्रवाई होगी, और शिका यत को दबाना या नजरअंदाज करना भी अपराध माना जाएगा।
इस संबंध में पुलिस मुख्यालय, सरदार पटेल भवन, पटना में ‘कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध एवं निवारण) अधिनियम, 2013’ यानी पॉश एक्ट पर आधारित जागरूकता और संवेदनशीलता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डीजीपी विनय कुमार ने कहा कि कार्यस्थल पर महिलाओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल सुनिश्चित करना संगठन की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम का आयोजन एडीजी (कमजोर वर्ग) अमित कुमार जैन के नेतृत्व में हुआ। उन्होंने बताया कि पॉश एक्ट के तहत दस या उससे अधिक कर्मचारियों वाली संस्थाओं में आंतरिक परिवाद समिति (ICC) बनाना अनिवार्य है। बिहार पुलिस में वर्तमान में 52 आंतरिक परिवाद समितियां सक्रिय हैं, जो प्राप्त शिकायतों की तथ्यात्मक जांच, काउंसलिंग और समयबद्ध सिफारिश करती हैं।
यदि पीड़िता घरेलू कामगार है या किसी संस्था में आंतरिक समिति नहीं है, तो ऐसे मामलों की सुनवाई जिला स्तरीय लोकल कंप्लेंट कमेटी (LCC) करेगी, जिसकी अध्यक्षता जिला पदाधिकारी करेंगे। इस व्यवस्था से यह सुनिश्चित होता है कि किसी भी महिला को न्याय से वंचित नहीं किया जाएगा।
केंद्रीय क्षेत्र के आईजी और पटना जिला आंतरिक समिति के अध्यक्ष ने सभी जिलों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने स्तर पर जागरूकता, संवेदनशीलता और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करें। कार्यक्रम में एसपी कमजोर वर्ग आमिर जावेद, एसपीसी अंकित कश्यप, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में महिला पुलिसकर्मी उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि पीड़िता का सम्मान और गोपनीयता सर्वोपरि है, और यही पॉश एक्ट की आत्मा भी है।
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