News Saga Desk
बिहार में निर्बाध और सस्ती बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। नवादा जिले के फुलवरिया जलाशय में राज्य का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट विकसित किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत 10 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा, जिससे अगले 25 वर्षों तक उपभोक्ताओं को किफायती दरों पर बिजली उपलब्ध कराई जा सकेगी।
यह फ्लोटिंग सोलर पावर परियोजना बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड द्वारा विकसित की जा रही है। यह योजना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दूरदर्शी परिकल्पना ‘नीचे मछली–ऊपर बिजली’ को साकार करने की दिशा में एक अहम पहल मानी जा रही है। परियोजना का स्थल नवादा के रजौली प्रखंड अंतर्गत हरदिया पंचायत के पास स्थित फुलवरिया डैम है, जो पर्यावरण, पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिहाज से भी महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
इस परियोजना में जलाशय की सतह पर तैरते हुए सौर पैनल लगाए जाएंगे, जिनके माध्यम से बिजली का उत्पादन किया जाएगा। खास बात यह है कि इससे जलाशय की उपयोगिता बढ़ेगी और भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी। इसके साथ ही जलाशय में मछली पालन जारी रहेगा, जिससे स्थानीय लोगों की आजीविका को भी बढ़ावा मिलेगा।
राज्य में फ्लोटिंग सोलर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अन्य स्थानों पर भी काम चल रहा है। दरभंगा में 1.6 मेगावाट और सुपौल में 525 किलोवाट क्षमता की फ्लोटिंग सौर परियोजनाओं के माध्यम से पहले से ही बिजली उत्पादन किया जा रहा है।
सरकार का मानना है कि इस परियोजना से न केवल राज्य में ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि नए उद्योगों को भी पर्याप्त बिजली उपलब्ध हो सकेगी। इससे आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी और बिहार अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में एक मजबूत पहचान बनाएगा।
पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी यह परियोजना काफी अहम है। फ्लोटिंग सोलर प्लांट स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के साथ जल संरक्षण, कार्बन उत्सर्जन में कमी और ग्रामीण विकास को एक साथ बढ़ावा देगा। फुलवरिया जलाशय पर बनने वाला यह प्रोजेक्ट भविष्य में बिहार में अक्षय ऊर्जा के विस्तार के लिए एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।
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