News Saga Desk
नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिल रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत $110.74 प्रति बैरल तक पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात नहीं सुधरे, तो कीमतें $150 प्रति बैरल तक जा सकती हैं, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती साबित हो सकती है।
तेल कीमतों में उछाल की वजह
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनातनी ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की चेतावनी ने बाजार में अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है। यह मार्ग दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल और गैस आपूर्ति का प्रमुख रास्ता है। इसके बंद होने की स्थिति में पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ प्लास्टिक, उर्वरक और एल्युमीनियम जैसी वस्तुएं भी महंगी हो सकती हैं।
भारत के लिए बढ़ती चिंता
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 90% कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में कीमतों में हर $1 की बढ़ोतरी से देश का आयात बिल करीब ₹16,000 करोड़ तक बढ़ जाता है। इसके अलावा डॉलर की मांग बढ़ने से रुपये पर दबाव पड़ेगा, जिससे विदेश यात्रा, शिक्षा और आयातित वस्तुएं महंगी हो जाएंगी।
महंगाई की सीधी मार आम लोगों पर
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से परिवहन लागत में इजाफा होता है, जिसका असर सीधे रोजमर्रा की वस्तुओं पर पड़ता है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से फल, सब्जी और राशन के दाम बढ़ सकते हैं। बाजार विशेषज्ञों और कोटक सिक्योरिटीज जैसी संस्थाओं ने भी चेतावनी दी है कि हालात बिगड़ने पर कीमतें $150 तक पहुंच सकती हैं।
तेल कीमतों में हालिया बढ़ोतरी (डॉलर प्रति बैरल)
| तेल बास्केट / क्रूड | 27 फरवरी ($) | 19 मार्च ($) | बढ़ोत्तरी (%) |
|---|---|---|---|
| इंडियन बास्केट | 71 | 121 | 71% |
| ओपेक बास्केट | 70 | 111 | 59% |
| ब्रेंट क्रूड | 73 | 112 | 54% |
| WTI क्रूड | 67 | 112 | 67% |
No Comment! Be the first one.