News Saga Desk
नई दिल्ली | दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली के 27 औद्योगिक इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की कमी पर एतराज जताते हुए दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को तलब किया है। जस्टिस प्रतिभा सिंह की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली के मुख्य सचिव को 22 नवंबर को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया।
दरअसल, दिल्ली उच्च न्यायालय दिल्ली के औद्योगिक पुनर्विकास और प्रदूषण के प्रबंधन को लेकर स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है। कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि अगस्त, 2023 में मंत्रिमंडल के फैसले के बावजूद इन औद्योगिक क्षेत्रों में पुनर्विकास का काम नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा कि इसे लेकर कोई स्पष्टता नहीं है कि औद्योगिक इलाकों में सीवेज और ड्रैनेज सिस्टम स्थापित करने के लिए कौन जिम्मेदार है।
कोर्ट ने दिल्ली के मुख्य सचिव राजीव वर्मा के अलावा अतिरिक्त मुख्य सचिव (उद्योग) बिपुल पाठक, डीएसआईआईडीसी के एमडी नजुक कुमार, दिल्ली नगर निगम के आयुक्त अश्विनी कुमार और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी के सचिव संदीप मिश्रा को अगली सुनवाई में कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वो 10 नवंबर को एक संयुक्त बैठक करें और स्थिति को बेहतर करने के लिए उठाये जाने वाले कदमों को लेकर 15 नवंबर तक हलफनामा दाखिल करें।
कोर्ट ने कहा कि बिना किसी सीवेज ट्रीटमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर के इन औद्योगिक इलाकों में उद्योग संचालित हो रहे हैं। इससे भूजल में मिलावट का खतरा है। इसके अलावा बिना शोधित पानी के यमुना में भी बहने का खतरा है। ये स्थिति काफी गंभीर है।
कोर्ट ने इन अधिकारियों के अलावा तीन कंसल्टेंट एजेंसियों मेसर्स क्रिएटिव सर्किल, मेसर्स एसएबीएस आर्टिकेट्क्ट एंड इंजीनियर्स प्राईवेट लिमिटेड और मेसर्स स्क्वायर डिजाइंस के प्रतिनिधियों को भी सुनवाई की अगली तिथि को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया।
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