सीधा संवाद, त्वरित समाधान: बिहार में ‘जनता दरबार’ व्यवस्था लागू

News Saga Desk

बिहार सरकार ने प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने की दिशा में एक अहम पहल की है। सोमवार से राज्य में एक नया सिस्टम लागू कर दिया गया है, जिसके तहत आम लोग अब सीधे सरकारी अधिकारियों से मिलकर अपनी समस्याएं रख सकेंगे। इसके लिए हर सप्ताह सोमवार और शुक्रवार को सभी सरकारी कार्यालयों में जनता के लिए विशेष बैठक का आयोजन किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक जनोन्मुखी बनाना है।

राज्यभर में लागू होगी व्यवस्था

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को इस पहल की घोषणा की थी, जिसके बाद मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। नई व्यवस्था के तहत ग्राम पंचायत, थाना, अंचल, प्रखंड, अनुमंडल, जिला, प्रमंडल और राज्य स्तर के सभी सरकारी कार्यालयों में आम नागरिक अधिकारियों से सीधे मुलाकात कर सकेंगे। इससे लंबी प्रक्रियाओं और अधिकारियों तक पहुंच में आने वाली बाधाओं से राहत मिलने की उम्मीद है।

शिकायत रजिस्टर और सतत मॉनिटरिंग

जनता की शिकायतों को व्यवस्थित ढंग से दर्ज करने के लिए सभी कार्यालयों में शिकायत रजिस्टर अनिवार्य रूप से रखा जाएगा। प्रत्येक शिकायत का रिकॉर्ड तैयार होगा और उसके निपटारे की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। इससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। साथ ही, सरकारी कार्यालयों में आने वाले लोगों के लिए पीने का पानी, बैठने की व्यवस्था और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि बैठक के दौरान किसी तरह की असुविधा न हो।

अधिकारी की अनुपस्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था

यदि निर्धारित दिन अधिकारी कार्यालय में उपस्थित नहीं रहते हैं, तो उनकी जगह अधिकृत अधिकारी जनता से मिलकर समस्याएं सुनेंगे और समाधान की प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे। सचिवालय में अधिकारियों से मिलने के लिए गेट पास अनिवार्य होगा। विभाग के अपर मुख्य सचिव से मिलने का समय तय किया गया है,
सोमवार: अपराह्न 4 बजे से 5 बजे तक
शुक्रवार: पूर्वाह्न 11 बजे से अपराह्न 1 बजे तक

कदम का महत्व

इस नई व्यवस्था से आम नागरिकों को सीधे अधिकारियों तक पहुंच मिलेगी, शिकायतों का विधिवत रिकॉर्ड बनेगा और समस्याओं का समाधान समयबद्ध तरीके से हो सकेगा। साथ ही, यह पहल बिहार में प्रशासन और जनता के बीच विश्वास को मजबूत करने और शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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