अबुआ दिशोम बजट 2026-27 को लेकर प्रोजेक्ट भवन में दो दिवसीय बजट पूर्व गोष्ठी शुरू

News Saga Desk

रांची: रजत जयंती वर्ष में जनहितकारी और मजबूत बजट पर मंथन, इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, सिंचाई और हरित विकास पर रहेगा विशेष फोकस।
झारखण्ड के रजत जयंती वित्तीय वर्ष में प्रस्तुत किए जाने वाले अबुआ दिशोम बजट 2026-27 को लेकर गुरुवार से प्रोजेक्ट भवन में दो दिवसीय बजट पूर्व गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता वित्त मंत्री श्री राधाकृष्ण किशोर ने की। इस दौरान नगर विकास मंत्री श्री सुदिव्य कुमार, कृषि मंत्री श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की, जल संसाधन मंत्री श्री हफीजुल हसन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी, विभागीय सचिव और विषय विशेषज्ञ मौजूद रहे। गोष्ठी का उद्देश्य बजट को अधिक प्रभावी, व्यावहारिक और जनोन्मुखी बनाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े सुझाव और अनुभव साझा करना है।

रजत जयंती वर्ष में मजबूत और जनहितकारी बजट का संकल्प

वित्त मंत्री श्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि अबुआ दिशोम बजट 2026-27 राज्य के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह झारखण्ड के गठन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार एक संतुलित, मजबूत और पब्लिक इंटरेस्ट आधारित बजट लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि बजट की सफलता कंसल्टेशन, सजेशन और इम्प्लीमेंटेशन-इन तीन स्तंभों पर निर्भर करती है। इसी सोच के तहत विशेषज्ञों, विभागों और हितधारकों से सुझाव लिए जा रहे हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर जोर

वित्त मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन की परिकल्पना के अनुरूप आगामी बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके साथ ही स्वास्थ्य क्षेत्र को भी बजट में विशेष महत्व देने की बात कही गई।

कृषि, सिंचाई और पर्यावरण से जुड़े विषयों पर गहन चर्चा

गुरुवार को आयोजित सत्र में कृषि एवं सिंचाई, वन एवं पर्यावरण, ग्रामीण विकास और आजीविका, नगर विकास एवं आवास, पथ निर्माण, उद्योग, खनन, पर्यटन तथा श्रम और कौशल विकास जैसे प्रमुख विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

गोष्ठी में चेक डैम निर्माण, वर्षा जल संचयन, नदियों के संरक्षण और वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए, जिन्हें बजट में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।

पर्यटन और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगा बढ़ावा

नगर विकास एवं पर्यटन मंत्री श्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि आगामी बजट में पर्यटन को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जाएगा। इससे राज्य में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत किया जाएगा।

कृषि क्षेत्र में नवाचार और बेस्ट प्रैक्टिसेज पर फोकस

कृषि मंत्री श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि बजट में नए और नवाचारी विचारों को स्थान दिया जाएगा। अन्य राज्यों की सफल योजनाओं और बेस्ट प्रैक्टिसेज को अपनाने पर भी विचार किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा मिलेट्स मिशन को “मड़ुवा क्रांति” नाम दिया गया है, जिसका सकारात्मक असर किसानों में देखने को मिल रहा है। इसके तहत किसानों को 3,000 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जा रही है और सिंचाई के लिए 5 एचपी सोलर आधारित वाटर पंप सेट उपलब्ध कराने की योजना है। उन्होंने केसीसी ऋण में बैंकों और एनजीओ की भागीदारी तथा अबुआ आवास योजना के लिए पर्याप्त बजटीय प्रावधान पर भी जोर दिया।

सिंचाई झारखण्ड की बड़ी चुनौती: हफीजुल हसन

जल संसाधन मंत्री श्री हफीजुल हसन ने कहा कि सिंचाई झारखण्ड की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है। उन्होंने वर्षा जल संचयन, छोटे तालाबों के पुनरुद्धार, माइनर इरीगेशन और लघु सिंचाई परियोजनाओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता जताई। उन्होंने सुझाव दिया कि 2.5 एकड़ में बने तालाबों के जीर्णोद्धार को बजट में शामिल किया जाए।

मध्यम और व्यवहारिक परियोजनाओं पर जोर

वित्त सह जल संसाधन सचिव श्री प्रशांत कुमार ने कहा कि बड़े प्रोजेक्ट्स की तुलना में मध्यम और व्यवहारिक परियोजनाएं अधिक प्रभावी साबित हो सकती हैं। उन्होंने लिफ्ट इरीगेशन आधारित खेती और छोटे जलस्रोतों के पुनरुद्धार को बजट में शामिल करने का सुझाव दिया।

सड़क, आवास और ग्रामीण उत्पादों पर चर्चा

पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव श्री सुनील कुमार ने बताया कि राज्य में कई सड़क और फ्लाइओवर परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि कई पर कार्य प्रगति पर है। आगामी वित्तीय वर्ष में नई परियोजनाओं को भी बजट में शामिल किया जाएगा।

ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री के. श्रीनिवासन ने अबुआ आवास योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, जेएसएलपीएस और मनरेगा के वित्तीय प्रबंधन पर चर्चा की। उन्होंने ग्रामीण उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए राज्य के सभी प्रखंडों में “पलाश मार्ट” की स्थापना का प्रस्ताव रखा।

हरित विकास और आजीविका संवर्धन पर मंथन

गोष्ठी में कृषि सचिव श्री अबू बकर सिद्दीकी, पर्यटन सचिव श्री मनोज कुमार, श्रम सचिव श्री जितेंद्र सिंह सहित राज्य और राज्य के बाहर से आए विशेषज्ञों ने भी अपने विचार रखे। कृषि, पशुपालन, डेयरी, हॉर्टिकल्चर, भंडारण क्षमता विस्तार और इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम पर विशेष चर्चा हुई।

वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग से जुड़े सत्र में बताया गया कि राज्य का 30 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र वन क्षेत्र है, जिसे ग्रीन इकोलॉजिकल सिस्टम के रूप में विकसित कर ग्रीन इन्वेस्टमेंट को प्रोत्साहित किया जा सकता है।

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