News Saga Desk
पश्चिम बंगाल में शुक्रवार को एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए। सुबह सबसे पहले दार्जिलिंग में 2.5 तीव्रता का हल्का भूकंप दर्ज किया गया। हालांकि इसकी तीव्रता कम थी, लेकिन दोपहर बाद आए तेज झटकों ने लोगों को दहशत में डाल दिया।
दोपहर 1 बजकर 22 मिनट पर आए भूकंप की तीव्रता 5.6 मापी गई। इसका केंद्र बांग्लादेश के खुलना में बताया गया है। झटकों का असर राजधानी कोलकाता तक महसूस किया गया, जहां लोग एहतियातन घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए।
अचानक डोलने लगीं इमारतें, सड़कों पर उतरे लोग
दोपहर में आए तेज झटकों से कई बहुमंजिला इमारतें हिल गईं। इससे घबराकर लोग घरों और कार्यालयों से बाहर निकल आए। पश्चिम बंगाल के अन्य जिलों में भी भूकंप का असर देखा गया।
कई कार्यालयों और आवासीय परिसरों में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। लोगों ने लिफ्ट का इस्तेमाल बंद कर सीढ़ियों का सहारा लिया। कुछ स्कूलों और निजी संस्थानों में एहतियातन गतिविधियां अस्थायी रूप से रोक दी गईं।
विशेषज्ञों के अनुसार भूकंप की तीव्रता मध्यम श्रेणी की थी, लेकिन केंद्र सीमा पार होने के कारण इसका असर व्यापक क्षेत्र में महसूस किया गया। प्रशासन ने नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने और आपात स्थिति में स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करने की अपील की है।
सुबह चार बजे भी महसूस हुए झटके
पिछले एक महीने से उत्तर बंगाल और उससे सटे इलाकों में लगातार भूकंप के झटके दर्ज किए जा रहे हैं। शुक्रवार सुबह करीब 4 बजे आए झटकों का असर उत्तर बंगाल में भी महसूस किया गया। उस समय अधिकांश लोग घरों में सो रहे थे, जबकि जाग रहे लोग एहतियातन बाहर निकल आए।
चार दिनों में 40 से अधिक झटके
इससे पहले बृहस्पतिवार को सिक्किम में एक ही दिन में 16 बार भूकंप दर्ज किए गए थे। फरवरी की शुरुआत से ही पड़ोसी राज्य में लगातार झटके महसूस किए जा रहे हैं। पिछले चार दिनों में 40 से अधिक बार धरती हिल चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार छोटे भूकंप कभी-कभी बड़े भूकंप से पहले के संकेत हो सकते हैं। वर्ष 2011 में सिक्किम में 6.9 तीव्रता का भूकंप आया था, जिससे व्यापक नुकसान हुआ था। वर्तमान में सिक्किम और उत्तर बंगाल में लगातार आ रहे झटकों के कारण लोगों में दहशत का माहौल है।
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