News Saga Desk
रांची। जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र स्थित लटमा रोड के एक फ्लैट में एक मां ने अपने दो मासूम बच्चों के साथ फांसी लगाकर जान दे दी। मृतकों की पहचान संयुक्ता सिंह उर्फ संध्या सिंह (35), आरव सिंह (12) और आराध्या सिंह (11) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, संयुक्ता ने पहले अपने दोनों बच्चों को दुपट्टे से एक साथ फांसी पर लटकाया और फिर खुद भी दुपट्टे के सहारे जान दे दी।
यह घटना तब सामने आई, जब शनिवार की शाम संयुक्ता का पति ब्रजेश कुमार सिंह फ्लैट पर पहुंचे। दरवाजा नहीं खुलने पर जगन्नाथपुर पुलिस को सूचना दी। उसने कहा कि वह बच्चों से मिलना चाहता है। लेकिन, न दरवाजा खुल रहा है और न ही कोई फोन उठा रहा है। शनिवार रात करीब 8 बजे पुलिस ब्रजेश के साथ फ्लैट पहुंची। दरवाजा खटखटाने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद पुलिस ने दरवाजा तोड़ा तो भीतर का दृश्य बेहद दर्दनाक था।
संयुक्ता का पति ब्रजेश सिंह निजी कंपनी में कार्यरत हैं और बाहर रहते हैं। दोनों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। यही वजह थी कि वे अलग-अलग रह रहे थे। संयुक्ता दोनों बच्चों के साथ लटमा स्थित फ्लैट में अकेली रहती थी। बताया जा रहा है कि आर्थिक तंगी के कारण वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगी थी।
बच्चों की फीस तक भरने के पैसे नहीं थे। इस कारण उसने बच्चों को स्कूल से निकाल लिया था। संयुक्ता का फ्लैट उसी के नाम पर था, लेकिन आय का कोई निश्चित स्रोत नहीं था। बैंक खाते में जो थोड़े-बहुत पैसे थे, वे भी खर्च हो चुके थे। वह हमेशा अपने बच्चों को साथ लेकर ही घर से निकलती थी। उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ती थी।

घटना जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र स्थित लटमा रोड की है।
मौत से पहले पुलिस से जताया था डर
आत्महत्या से करीब एक सप्ताह पहले संयुक्ता जगन्नाथपुर थाना पहुंची थी। उसने शिकायत की थी कि पति उसका पीछा करता है। उसे शक है कि वह उसकी और बच्चों की हत्या कर सकता है।
मामा ने कहा: पति से रिश्ता खराब होने के बाद तनाव में थी, किसी का दोष नहीं
मामा बैजनाथ सिंह ने पुलिस को बताया कि संयुक्ता के माता-पिता का निधन पहले ही हो चुका था। उन्होंने ही उसकी शादी कराई थी। संयुक्ता और ब्रजेश के बीच विवाद चल रहा था। इस कारण वह तनाव में रहने लगी थी। उसकी मानसिक स्थिति भी खराब थी। रिम्स में इलाज करवाने की कोशिश की गई थी। इस घटना के लिए किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है।
पड़ोसियों ने सुध नहीं ली, समाज की संवेदनहीनता भी उजागर
जिस अपार्टमेंट में यह परिवार रहता था, वहां एक ही फ्लोर पर चार फ्लैट हैं। दो दिन तक संयुक्ता का दरवाजा नहीं खुला, पर पड़ोसी ने सुध नहीं ली। दुर्गंध फैलने लगी, तब भी किसी ने पुलिस को सूचना नहीं दी। पड़ोसियों ने बताया कि बालकनी में कपड़े टंगे देखकर उन्हें लगा कि परिवार घर में ही है।
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