News Saga Desk
लोहरदगा : ऊंचे-ऊंचे पहाड़, घने जंगल और कलकल बहता झरना-लोहरदगा जिले का धरधरिया जलप्रपात प्रकृति की इसी अद्भुत छटा के लिए जाना जाता है। सालभर पर्यटकों की आवाजाही रहने वाले इस जलप्रपात में नए साल के मौके पर खासा रौनक देखने को मिलती है। प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर यह स्थल हर किसी का मन मोह लेने वाला है।
धरधरिया जलप्रपात का इतिहास जितना भयावह रहा है, वर्तमान उतना ही सुकून भरा बन चुका है। एक समय था जब दिन के उजाले में भी यहां आने से लोग डरते थे। 3 मई 2011 को हुई नक्सली घटना, जिसमें 11 जवान शहीद हो गए थे, के बाद यह इलाका लंबे समय तक खौफ के साये में रहा। स्थानीय लोग ही नहीं, बाहरी पर्यटक भी यहां आने से कतराते थे।
लेकिन समय के साथ हालात बदले। नक्सली गतिविधियों में कमी आई और इलाका धीरे-धीरे भयमुक्त हुआ। आज धरधरिया जलप्रपात पर्यटन के नक्शे पर अपनी अलग पहचान बना चुका है। अब यहां न सिर्फ स्थानीय लोग बल्कि दूर-दराज से आए पर्यटक भी बेझिझक पहुंच रहे हैं।
सेन्हा प्रखंड में स्थित यह जलप्रपात ऊंची चट्टानों से गिरते पानी और चारों ओर फैली पहाड़ियों व घने जंगलों के कारण बेहद आकर्षक नजर आता है। नए साल के अवसर पर सैलानी यहां पिकनिक मनाने पहुंच रहे हैं और प्राकृतिक नजारों को अपने कैमरों में कैद कर रहे हैं। पहाड़ों से गिरता झरना और हरियाली से भरा वातावरण लोगों को रोमांच और सुकून दोनों का एहसास कराता है।
धरधरिया जलप्रपात अब नए साल का स्वागत करने वालों के लिए एक पसंदीदा स्थल बन गया है। जिला प्रशासन भी इस क्षेत्र को पर्यटन विकास की दृष्टि से देख रहा है, ताकि भविष्य में इसे और बेहतर सुविधाओं के साथ एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके।
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