News Saga Desk
मुजफ्फरपुर में जीविका से जुड़ी महिलाएं अब डिजिटल युग के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं. जो महिलाएं कभी बैंक से पैसे निकालने के लिए अंगूठे का निशान लगाया करती थीं, आज वही महिलाएं स्मार्ट मोबाइल के जरिए UPI और मोबाइल बैंकिंग से लेन-देन कर रही हैं. जीविका की ओर से चलाए जा रहे प्रशिक्षण कार्यक्रम ने इन महिलाओं को आत्मनिर्भर और तकनीक-सक्षम बना दिया है.
जीविका से जुड़ी कई महिलाएं अब न सिर्फ साक्षर हो चुकी हैं, बल्कि मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट सर्फिंग और सरकारी पोर्टलों के इस्तेमाल में भी दक्ष हो गई हैं. इससे उन्हें सरकारी योजनाओं की जानकारी ऑनलाइन मिल रही है और अपने छोटे-छोटे व्यवसायों में कैश पर निर्भरता भी कम हुई है. यह बदलाव जीविका द्वारा दिए जा रहे निरंतर प्रशिक्षण का नतीजा है.
52 हजार समूहों में चल रहा प्रशिक्षण अभियान
जिले में करीब 6.5 लाख जीविका दीदियां हैं, जिनमें लगभग 30 प्रतिशत महिलाएं पहले निरक्षर थीं. इन्हें सशक्त बनाने के लिए जीविका द्वारा 52 हजार स्वयं सहायता समूहों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है. हर समूह की बैठक के बाद बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट दीदी महिलाओं को मोबाइल से लेन-देन, UPI उपयोग और सरकारी पोर्टलों की जानकारी दे रही हैं.
कई जीविका दीदियां छोटे उद्योग और व्यवसाय से जुड़ी हैं. मोबाइल बैंकिंग की जानकारी होने से उन्हें अपने कारोबार का हिसाब रखने और भुगतान करने में काफी सुविधा मिल रही है. मुशहरी की चंदा देवी बताती हैं कि पहले उन्हें अपना नाम लिखना भी नहीं आता था, लेकिन जीविका समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने पढ़ना-लिखना सीखा और अब मोबाइल से बैंकिंग लेन-देन भी कर रही हैं.
इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग से बदली जिंदगी
इस संबंध में जीविका की डीपीएम अनीशा बताती हैं कि सभी समूहों में महिलाओं को मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट के उपयोग की ट्रेनिंग दी जा रही है. इससे दीदियों का कौशल बढ़ा है और वे मोबाइल फ्रेंडली हो गई हैं. आज जिले की कई जीविका दीदियां UPI के माध्यम से नियमित लेन-देन कर रही हैं और अपने व्यवसाय का अधिकतर काम डिजिटल तरीके से कर रही हैं.
जीविका दीदियों की जुबानी
- चांदनी देवी (मुशहरी): मोबाइल से लेन-देन सीखने के बाद अब खरीदारी और भुगतान आसान हो गया है.
- चंचला देवी (औराई): पहले UPI पेमेंट नहीं ले पाती थी, अब कोई परेशानी नहीं होती.
- रिंकू कुमारी (औराई): मोबाइल बैंकिंग से पैसे लेना-देना बहुत आसान हो गया है.
- प्रतिमा देवी (मीनापुर): पहले स्मार्ट मोबाइल नहीं था, अब ऑनलाइन बैंकिंग से काम आसान है.
- संजू भारती (सकरा): अब हर काम के लिए एटीएम जाने की जरूरत नहीं पड़ती.
- रेणु देवी (सकरा): सब्जी की दुकान में अब मोबाइल बैंकिंग से ग्राहकों से भुगतान ले लेती हूं.
जीविका की यह पहल न सिर्फ महिलाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बना रही है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी बना रही है.
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