सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट, मुनाफावसूली और डॉलर की मजबूती का असर

News Saga Desk

भारतीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पिछले सत्र की तेज बढ़त के बाद मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) और अमेरिकी डॉलर की मजबूती इस गिरावट के प्रमुख कारण रहे। हालांकि, अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और वैश्विक व्यापार में टैरिफ संबंधी अनिश्चितता के कारण कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को नहीं मिली।

घरेलू वायदा बाजार में कमजोरी

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर मंगलवार सुबह सोना और चांदी दोनों दबाव में कारोबार करते दिखे। अप्रैल डिलीवरी वाला सोना 0.58 प्रतिशत गिरकर 1,60,664 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं, मार्च वायदा चांदी 0.33 प्रतिशत कमजोर होकर 2,64,450 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिकवाली का दबाव

वैश्विक बाजारों में भी बिकवाली का असर साफ दिखाई दिया। कोमेक्स (Comex) पर सोना वायदा 1.1 प्रतिशत गिरकर 5,170.70 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि स्पॉट गोल्ड 1.5 प्रतिशत की गिरावट के साथ 5,150.38 डॉलर प्रति औंस पर रहा।

चांदी में गिरावट और अधिक रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी 3.1 प्रतिशत टूटकर 85.50 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।

डॉलर की मजबूती से दबाव

डॉलर इंडेक्स में मजबूती का भी सोने-चांदी पर असर पड़ा। डॉलर इंडेक्स इंट्रा-डे बढ़त के साथ 97.89 के स्तर पर पहुंच गया। डॉलर मजबूत होने से अन्य मुद्राओं के निवेशकों के लिए सोना-चांदी खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे मांग पर दबाव बनता है।

‘टैरिफ अनिश्चितता’ और ट्रंप का बयान

बाजार विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा आपातकालीन टैरिफ से जुड़े फैसले के बाद व्यापारिक अनिश्चितता बढ़ गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी चेतावनी दी है कि व्यापार समझौतों से पीछे हटने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाया जा सकता है। इस स्थिति ने सोने की सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) के रूप में मांग को समर्थन दिया है।

ईरान तनाव और चीन की मांग से मिला सहारा

ईरान के साथ संभावित समझौते की समय-सीमा नजदीक होने से भू-राजनीतिक तनाव बना हुआ है, जिससे सोने को निचले स्तरों पर समर्थन मिला है।

वहीं, लूनर न्यू ईयर की छुट्टियों के बाद चीन का बाजार खुलने से वैश्विक तरलता में सुधार हुआ है। चीन में चांदी की मजबूत औद्योगिक मांग के कारण वहां कीमतें पश्चिमी बाजारों की तुलना में प्रीमियम पर बनी हुई हैं।

कुल मिलाकर, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में सोने और चांदी की कीमतें वैश्विक आर्थिक संकेतों, डॉलर की चाल और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर रहेंगी।

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