नेपाल में जेन-जी आंदोलन के बाद सरकारी भवन छह महीने बाद भी जर्जर, पुनर्निर्माण सुस्त

News Saga Desk

काठमांडू: नेपाल में पिछले वर्ष 8 और 9 सितंबर को हुए जेन-जी आंदोलन के दौरान आगजनी में क्षतिग्रस्त हुए सरकारी भवनों का पुनर्निर्माण अब तक शुरू नहीं हो सका है। छह महीने बीत जाने के बावजूद देश के कई प्रमुख प्रशासनिक भवन जर्जर स्थिति में हैं और उपयोग के लायक नहीं रह गए हैं।

देश के प्रमुख प्रशासनिक केंद्र सिंहदरबार, जहां प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर अधिकांश मंत्रालय स्थित हैं, वहां जले हुए ढांचे अब भी मरम्मत की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इसी तरह प्रधानमंत्री आवास, राष्ट्रपति भवन शीतल निवास और सर्वोच्च अदालत जैसी अहम इमारतें भी अब तक पूरी तरह बहाल नहीं हो पाई हैं। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र, जिसे फिलहाल संसद भवन के रूप में उपयोग किया जा रहा है, आज भी आग के निशानों के साथ खड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी समय पर मरम्मत और रंगाई से देश की छवि को नुकसान से बचाया जा सकता था, लेकिन इस दिशा में पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए।

अस्थायी हॉल में होगा सांसदों का शपथ ग्रहण

संसद भवन परियोजना के तहत निर्माणाधीन नया भवन सांसदों के शपथ ग्रहण से पहले पूरा नहीं हो सका है। ऐसे में 26 मार्च को सांसदों को अस्थायी हॉल में शपथ दिलाई जाएगी। संघीय संसद सचिवालय के प्रवक्ता एकराम गिरी के अनुसार, नए भवन में संसद हॉल का निर्माण अभी अधूरा है, इसलिए बहुउद्देश्यीय हॉल का उपयोग किया जाएगा। वर्ष 2019 में शुरू हुई इस परियोजना का निर्माण छह साल बाद भी करीब 90–92 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है।

सैकड़ों भवन अब भी क्षतिग्रस्त

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आंदोलन के दौरान 629 भवन पूरी तरह नष्ट हो गए थे, जबकि 560 से अधिक आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए। इनमें 310 सरकारी कार्यालय पूरी तरह ध्वस्त हो गए। इसके बावजूद भौतिक पूर्वाधार मंत्रालय ने अब तक पुनर्निर्माण को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया है। मंत्रालय के सूचना अधिकारी ज्ञानराज लम्साल ने भी स्वीकार किया है कि सरकार से इस संबंध में अब तक कोई स्पष्ट निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है।

आंशिक मरम्मत, लेकिन काम अधूरा

शहरी विकास विभाग के मुताबिक, हल्के रूप से क्षतिग्रस्त 166 भवनों में से 54 को उपयोग में लाया जा चुका है और 34 की मरम्मत जारी है। वहीं 100 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त भवनों में से 56 के लिए ठेके जारी किए गए हैं। 28 गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त भवनों के पूर्ण पुनर्निर्माण की आवश्यकता है।

पुलिस विभाग के 177 भवन पूरी तरह अनुपयोगी हो गए थे, जबकि 258 मरम्मत योग्य थे। इनमें से अधिकांश को पुनर्निर्माण के बाद फिर से चालू कर दिया गया है। इसके अलावा, राजनीतिक दलों के 45 कार्यालय पूरी तरह नष्ट हुए और 174 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए।

स्थिति को देखते हुए यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इतने बड़े नुकसान के बावजूद पुनर्निर्माण कार्य में देरी क्यों हो रही है, और इसका असर देश की छवि पर भी पड़ रहा है।

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