News Saga Desk
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और दबावों के बावजूद भारत और रूस के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग लगभग अप्रभावित है. जब उनसे पूछा गया कि क्या प्रतिबंधों की वजह से भारत ने रूसी कच्चे तेल की खरीद कम की है, तो उन्होंने बताया कि वर्ष के पहले नौ महीनों में दोनों देशों के कुल व्यापार में थोड़ा गिरावट जरूर दर्ज की गई है, लेकिन ऊर्जा साझेदारी स्थिर बनी हुई है।
साझेदारी तीसरे देश के खिलाफ नहीं, पुतिन
एक निजी न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में पुतिन ने कहा कि भारत और रूस की साझेदारी किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसका मकसद केवल दोनों देशों के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है। उन्होंने यह टिप्पणी उन सवालों के जवाब में की, जो अमेरिका के कड़े रुख और प्रतिबंधों को लेकर पूछे गए थे।
पुतिन ने कहा:
“कुछ देशों को भारत की ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती भूमिका पसंद नहीं है और वे राजनीतिक कारणों से भारत-रूस संबंधों में बाधा डालने की कोशिश कर रहे हैं।”
अमेरिका की पॉलिसी पर प्रतिक्रिया
पुतिन की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत और अमेरिका के संबंध पिछले दो दशकों के सबसे कमजोर चरण में बताए जा रहे हैं। अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 50% तक शुल्क लगाया है और रूस से भारत की तेल खरीद पर 25% कर लगाया है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पुतिन ने कहा:
“बाहरी दबावों के बावजूद न मैंने और न ही प्रधानमंत्री मोदी ने कभी भारत-रूस साझेदारी का इस्तेमाल किसी तीसरे देश के खिलाफ किया है।”
भारत को तेल खरीदने का पूरा अधिकार, पुतिन
उन्होंने अमेरिका की आपत्ति खारिज करते हुए सवाल उठाया:
“जब अमेरिका खुद रूस से परमाणु ईंधन खरीद सकता है, तो भारत को रूसी तेल खरीदने से क्यों रोका जाए?”
उन्होंने बताया कि अमेरिका आज भी अपने परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए रूस से ईंधन आयात करता है।
पुतिन 4 दिसंबर की शाम भारत पहुंचे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दो दिवसीय शिखर बैठक कर रहे हैं, जिसमें व्यापार, रक्षा और ऊर्जा सहयोग से जुड़े फैसले होने की उम्मीद है।
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