NEWS SAGA DESK
नई दिल्ली में आयोजित 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत और रूस ने यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) के साथ प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत को तेज करने पर सहमति जताई है। यह निर्णय रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दो दिन के भारत दौरे के समापन पर हुई उच्चस्तरीय चर्चा के दौरान लिया गया।
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि प्रस्तावित FTA पर विस्तार से बातचीत की गई और इस दौरे के दौरान इसके टर्म्स ऑफ रेफरेंस को अंतिम रूप देकर उस पर हस्ताक्षर भी किए गए। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने तय समय सीमा के भीतर ठोस परिणाम हासिल करने के लिए वार्ता प्रक्रिया में तेजी लाने पर जोर दिया। मिसरी के अनुसार, यह समझौता भारत और यूरेशिया के बीच व्यापार असंतुलन को कम करने में मददगार साबित हो सकता है।
मिसरी ने बताया कि बैठक में द्विपक्षीय निवेश संधि, इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर, कनेक्टिविटी सुधार और ट्रांसिट समय घटाने जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से यूरेशियन क्षेत्र में भारत की व्यापारिक पहुँच और मजबूत होगी।
राष्ट्रपति पुतिन के दौरे को भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए मिसरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एयरपोर्ट पर स्वयं पुतिन का स्वागत किया और उनके सम्मान में रात्रिभोज का आयोजन किया। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर खुलकर चर्चा की।
मिसरी ने कहा कि रूस के साथ रक्षा और सैन्य तकनीक सहयोग मजबूत बना हुआ है और रूस भारत के ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत संयुक्त उत्पादन और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देता रहेगा। साथ ही, कजान और येकातेरिनबर्ग में नए भारतीय वाणिज्य दूतावास खोलने की प्रक्रिया तेज करने पर भी चर्चा हुई।
वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करते हुए मिसरी ने बताया कि दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया और G20, ब्रिक्स तथा एससीओ जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग मजबूत करने की बात कही। पुतिन ने यूक्रेन संघर्ष से जुड़े हालिया घटनाक्रमों की जानकारी दी, जिस पर प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के शांतिपूर्ण समाधान के पक्ष में पुराने रुख को दोहराते हुए कहा कि भारत बातचीत और कूटनीति के जरिए स्थायी समाधान चाहता है।
मिसरी ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो-टॉलरेंस नीति का भी उल्लेख किया गया और रूस ने इस दिशा में भारत के प्रयासों को पूर्ण समर्थन दिया। उन्होंने इस दौरे को आर्थिक सहयोग, औद्योगिक साझेदारी और निवेश संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया, खासकर उस समय जब वैश्विक सप्लाई चेन और व्यापार संबंध गंभीर दबाव का सामना कर रहे हैं।
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