भारत ने छठी बार जीता अंडर-19 वर्ल्ड कप, फाइनल में 14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी का तूफान, इंग्लैंड को 100 रन से हराया

News Saga Desk

भारतीय अंडर-19 टीम ने एक बार फिर विश्व क्रिकेट में अपना दबदबा साबित करते हुए रिकॉर्ड छठी बार अंडर-19 वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम कर लिया। हरारे स्पोर्ट्स ग्राउंड पर खेले गए फाइनल मुकाबले में भारत ने इंग्लैंड को 100 रन से हराकर शानदार जीत दर्ज की। कप्तान आयुष म्हात्रे की अगुवाई में टीम इंडिया ने पूरे टूर्नामेंट में दमदार प्रदर्शन किया।

टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने निर्धारित 50 ओवर में 9 विकेट पर 411 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की टीम 40.2 ओवर में 311 रन पर ऑलआउट हो गई।

फाइनल के हीरो बने वैभव सूर्यवंशी

खिताबी मुकाबले में 14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने ऐतिहासिक पारी खेलते हुए मात्र 80 गेंद में 175 रन ठोक दिए। उनकी इस विस्फोटक पारी में 15 चौके और 15 छक्के शामिल रहे। यह अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल के इतिहास का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर है।

पूरे टूर्नामेंट में शुरुआत में शांत रहने वाले सूर्यवंशी ने सेमीफाइनल में 68 रन बनाने के बाद फाइनल में अपनी पूरी क्षमता दिखाई। उन्होंने कुल 439 रन बनाकर टूर्नामेंट में दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज का स्थान हासिल किया। उनकी इस पारी में 150 रन सिर्फ बाउंड्री से आए।

सूर्यवंशी ने कई रिकॉर्ड भी अपने नाम किए। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 22 छक्के लगाकर एक यूथ वनडे संस्करण में सबसे ज्यादा छक्कों का रिकॉर्ड बनाया। साथ ही, उन्होंने अंडर-19 क्रिकेट में सबसे तेज 150 रन (71 गेंद) बनाने का कारनामा भी किया।

अन्य बल्लेबाजों का भी योगदान

कप्तान आयुष म्हात्रे ने 51 गेंद में 53 रन बनाए। इसके अलावा अभिज्ञान कुंडू (40), वेदांत त्रिवेदी (32), विहान मल्होत्रा (30) और कनिष्क चौहान ने नाबाद 37 रन की उपयोगी पारियां खेलीं।

इंग्लैंड ने किया संघर्ष

412 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए इंग्लैंड ने शुरुआत में संघर्ष किया और एक समय 20 ओवर में 171/3 तक पहुंच गया था। हालांकि भारतीय गेंदबाजों ने शानदार वापसी करते हुए नियमित अंतराल पर विकेट लिए। इंग्लैंड की ओर से फॉल्कनर ने 63 गेंद में शतक लगाया, लेकिन टीम को जीत नहीं दिला सके। भारत के लिए तेज गेंदबाज आरएस अंबरीश ने सबसे ज्यादा तीन विकेट झटके।

विजेता कप्तानों की परंपरा जारी

भारत ने इससे पहले मोहम्मद कैफ (2000), विराट कोहली (2008), उनमुक्त चंद (2012), पृथ्वी शॉ (2018) और यश ढुल (2022) की कप्तानी में खिताब जीता था। अब आयुष म्हात्रे का नाम भी इस गौरवशाली सूची में शामिल हो गया है।

इस जीत के साथ भारतीय युवा क्रिकेट ने एक बार फिर संकेत दे दिया है कि देश का क्रिकेट भविष्य सुरक्षित हाथों में है।

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