7 मार्च को बढ़े घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडरों के दामों के बाद आम लोगों में हलचल मचा दी है। जब से ये खबर आयी है तब से बुकिंग मुश्किल भी है। इसी बीच अब भारत सरकार ने इन परेशानियों से निपटने के लिए ESMA लागू कर दिया है। ईरान–इजरायल और अमेरिका संघर्ष के बाद दुनिया में एलपीजी सप्लाई संकट की आशंका को देखते हुए सरकार ने घरेलू प्राकृतिक गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ESMA (Essential Services Maintenance Act) के तहत आपातकालीन प्रावधान लागू किए हैं। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में गैस की सप्लाई बाधित न हो और आवश्यक क्षेत्रों को पर्याप्त गैस मिलती रहे।
केंद्र सरकार ने 2026 में प्राकृतिक गैस (सप्लाई रेगुलेशन) आदेश जारी किया है, जो राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख से लागू होगा। इसके तहत गैस की आपूर्ति को अलग-अलग प्राथमिकता वाले सेक्टरों में बांटा गया है।
ESMA क्या है?
ESMA, जिसे भारत की संसद ने 1968 में बनाया था। इसका उद्देश्य जरूरी सेवाओं को बिना रुकावट जारी रखना है। इस कानून के तहत आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारी हड़ताल या काम बंद नहीं कर सकते। यदि ऐसा होता है तो सरकार उन्हें काम पर लौटने का निर्देश दे सकती है। सरकार ने तय किया है कि अगर गैस की कमी होती है, तो सबसे पहले जरूरी सेक्टरों को गैस दी जाएगी।
किसे सबसे पहले गैस मिलेगी?
प्राथमिकता सेक्टर 1
घरेलू पाइप्ड प्राकृतिक गैस (PNG)
परिवहन के लिए CNG
एलपीजी उत्पादन
पाइपलाइन कम्प्रेसर और आवश्यक संचालन
इन सेक्टरों को पिछले 6 महीने की औसत खपत का 100% तक गैस उपलब्ध कराई जाएगी।
प्राथमिकता सेक्टर 2
उर्वरक प्लांट्स को पिछले 6 महीने की औसत खपत का 70% गैस मिलेगी। इसका उपयोग केवल उर्वरक उत्पादन के लिए होगा और इसकी रिपोर्ट PPAC को देनी होगी। आवंटित गैस किसी अन्य यूनिट को ट्रांसफर नहीं की जा सकेगी।
प्राथमिकता सेक्टर 3
राष्ट्रीय गैस ग्रिड से जुड़े चाय उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग और अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं को पिछले 6 महीने की औसत खपत का 80% गैस दी जाएगी। इसके नियम PPAC और इंडस्ट्री कमेटी तय करेंगे।
प्राथमिकता सेक्टर 4
सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) नेटवर्क से जुड़े औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को भी औसत खपत का 80% गैस दी जाएगी।
जरूरत पड़ने पर पेट्रोकेमिकल यूनिट्स और कुछ पावर प्लांट्स की गैस आपूर्ति घटाई जा सकती है। वहीं तेल शोधन कंपनियों को पिछले 6 महीने की औसत खपत का लगभग 65% गैस उपलब्ध कराई जाएगी।
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