News saga Desk
रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में मंगलवार को वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1 लाख 58 हजार 560 करोड़ रुपये का ‘अबुआ बजट’ पेश किया। सरकार का दावा है कि यह बजट राज्य में विकास के नए अवसर खोलेगा और विशेष रूप से किसानों, ग्रामीण क्षेत्रों तथा आधारभूत संरचना को मजबूती देगा।
खनन आय में कमी, बजट स्थिरीकरण कोष का गठन
केंद्र सरकार के साथ विवाद के कारण खनन क्षेत्र से होने वाली आय में कमी आई है। इसकी भरपाई के लिए राज्य सरकार ने झारखंड बजट स्थिरीकरण कोष का प्रावधान किया है। इस कोष में कुल 2041 करोड़ रुपये रखे गए हैं। इसमें वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 832 करोड़ रुपये तथा 2026-27 के लिए 1209 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 में राजस्व व्यय के लिए 1 लाख 20 हजार 851 करोड़ 90 लाख रुपये प्रस्तावित हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.2 प्रतिशत अधिक है। वहीं पूंजीगत व्यय में 8.5 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए लगभग 37 हजार 708 करोड़ 10 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।
किसानों के लिए योजनाओं का विस्तार
बजट में कृषि क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी गई है। बिरसा बीज उत्पादन योजना के तहत 2025-26 में 7 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिला। वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना में 145 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

बंजर भूमि सुधार के लिए 475 करोड़ 50 लाख रुपये तथा सौर ऊर्जा चालित सिंचाई इकाइयों को बढ़ावा देने के लिए 75 करोड़ रुपये रखे गए हैं। कृषि यंत्र, पावर टिलर और पंपसेट के वितरण के लिए 80 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

सुखाड़ से निपटने के लिए राज्य मिलेट मिशन के तहत 25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। नकदी फसलों जैसे गन्ना और जूट के विस्तार के लिए 19 करोड़ 88 लाख रुपये तथा सब्जी, फूल, मधुमक्खी पालन और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 245 करोड़ 80 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों की सहायता के लिए राज्य सरकार ने 400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। साथ ही भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए विभिन्न क्षमता के गोदामों के निर्माण पर 160 करोड़ 26 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कोऑपरेटिव मार्केटिंग परिसर और सोलर आधारित कोल्ड रूम के निर्माण पर 162 करोड़ 20 लाख रुपये खर्च होंगे।
ग्रामीण विकास और अबुआ आवास योजना
ग्रामीण विकास के लिए बजट में 12 हजार 346 करोड़ 90 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। अबुआ आवास योजना के तहत लाभुकों को पांच किस्तों में 2 लाख रुपये की सहायता दी जाती है। अब तक 6 लाख 33 हजार से अधिक आवास स्वीकृत हो चुके हैं, जिनमें से करीब 1 लाख 88 हजार आवास पूर्ण हो चुके हैं। शेष आवास 2026-27 में पूरे किए जाएंगे। इसके लिए 4100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
सखी मंडलों के उत्पादों के विपणन के लिए पलाश ब्रांड के तहत पलाश मार्ट पर 66 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जबकि स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक सहायता के लिए 70 करोड़ रुपये का प्रावधान है।
पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा
पशुपालन और डेयरी क्षेत्र के लिए 481 करोड़ 35 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। गिरिडीह और सरायकेला में प्रतिदिन 50 हजार लीटर क्षमता वाली नई डेयरी स्थापित की जाएगी। वहीं रांची में 20 मीट्रिक टन क्षमता का मिल्क पाउडर प्लांट और उच्च क्षमता का डेयरी उत्पाद संयंत्र स्थापित होगा।

मत्स्य पालन और फिश पार्क की योजना
मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के लिए तालाब और जलाशयों के विकास पर 106 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बायोफ्लॉक, केज कल्चर और मत्स्य बीज हैचरी को बढ़ावा दिया जाएगा। डोरंडा में फिश पार्क और मत्स्य निदेशालय परिसर में बटन तालाब का विकास भी किया जाएगा।
कृषि एवं इससे जुड़े क्षेत्रों के विकास पर कुल 4 हजार 884 करोड़ 20 लाख रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है।
सिंचाई और जल संसाधन पर जोर
जल संसाधन विभाग के लिए 2714 करोड़ 71 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। नई सिंचाई परियोजनाओं के निर्माण और पुरानी योजनाओं को पूरा करने के लिए 1137 करोड़ 10 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। पुरानी परियोजनाओं के जीर्णोद्धार के लिए 121 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।
पलामू जिले में अमानत बैराज परियोजना का पुनरीक्षित प्राक्कलन तैयार कर अगले तीन वर्षों में इसे पूरा करने की योजना है। इसके पूरा होने पर 12 हजार 856 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी।
इसके अलावा लघु सिंचाई योजनाओं के तहत चेक डैम और वीयर निर्माण के लिए 215 करोड़ रुपये तथा मध्यम सिंचाई परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाया जाएगा।
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