News Saga Desk
रांची : झारखंड में कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बीते कुछ महीनों में राज्य के अलग-अलग जिलों से ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जहां अपराधी और सजायाफ्ता कैदी कोर्ट परिसर, अति-सुरक्षित जेल और पुलिस थाना से फरार होने में कामयाब रहे। इन घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर चिंता बढ़ा दी है।
हाल ही में 7 जनवरी को पाकुड़ जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम की अदालत ने हत्या के एक मामले में शिवधन मोहली और नरेन मोहली को दोषी करार दिया। लेकिन फैसले के तुरंत बाद दोनों आरोपी कोर्ट परिसर से फरार हो गए, जिससे न्यायालय की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे।
इसी तरह 31 दिसंबर 2025 को राज्य की सबसे सुरक्षित जेलों में गिनी जाने वाली हजारीबाग स्थित लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा से तीन कैदी फरार हो गए। फरार कैदियों की पहचान देवा भुइयां उर्फ देव कुमार, राहुल रजवार और जितेंद्र रवानी के रूप में हुई। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि तीनों रात के समय शौचालय जाने के बहाने बाहर निकले और टेंट हाउस में इस्तेमाल होने वाले कपड़ों को जोड़कर रस्सी बनाई। इसी रस्सी की मदद से उन्होंने करीब 17 फीट ऊंची जेल की दीवार फांदकर फरारी को अंजाम दिया।
इसके अलावा जमशेदपुर में भी पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई थी। सिदगोड़ा थाना क्षेत्र में हथियार के साथ गिरफ्तार आरोपी अंशु चौहान से जुड़े मामले में मोहित सिंह का नाम सामने आया था। 12 मई 2025 को पुलिस ने मोहित सिंह को गिरफ्तार किया, लेकिन कुछ ही समय बाद वह थाना परिसर से फरार हो गया। हालांकि, पुलिस ने करीब आठ महीने की मशक्कत के बाद उसे दोबारा गिरफ्तार कर लिया।
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