News Saga Desk
लोकसभा ने गुरुवार को विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच ‘विकसित भारत–जी राम जी विधेयक, 2025’ को पारित कर दिया। विधेयक के खिलाफ विपक्षी गठबंधन इंडिया के कई घटक दलों ने सुबह संसद परिसर में प्रदर्शन किया था। विधेयक पर चर्चा के दौरान ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस और विपक्ष पर तीखा हमला बोला।
शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में कहा कि अपनी बात कहना और फिर जवाब न सुनना भी एक तरह की “हिंसा” है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल महात्मा गांधी के आदर्शों की बात तो करते हैं, लेकिन व्यवहार में उनके सिद्धांतों के खिलाफ काम कर रहे हैं। चौहान ने कहा कि कांग्रेस मनरेगा के नाम पर केवल राजनीति करती रही है, जबकि मोदी सरकार जमीन पर काम कर रही है।
उन्होंने प्रियंका गांधी पर भी पलटवार करते हुए कहा कि योजनाओं के नाम रखने की सनक कांग्रेस की रही है। चौहान ने आरोप लगाया कि कई योजनाओं के नाम नेहरू परिवार को महिमामंडित करने के लिए रखे गए, जबकि मौजूदा सरकार विकास और परिणाम पर जोर दे रही है।
विधेयक को समिति को भेजने की मांग खारिज
विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने इसे संसद की स्थायी समिति या संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजने की मांग उठाई। हालांकि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष की इस मांग को अस्वीकार कर दिया। अध्यक्ष ने कहा कि इस विधेयक पर 99 सांसदों ने अपने विचार रखे हैं और देर रात तक व्यापक चर्चा हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि विपक्ष के आग्रह पर चर्चा का समय बढ़ाया गया था।
हंगामे पर अध्यक्ष और मंत्री की टिप्पणी
ओम बिरला ने विपक्षी सदस्यों से कहा कि इस तरह का विरोध संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है। इसके बाद जब ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चर्चा का जवाब देना शुरू किया तो उन्होंने कहा कि विपक्ष का इस प्रकार का विरोध महात्मा गांधी के अहिंसा के सिद्धांत के विपरीत है। इस टिप्पणी के बाद सदन में एक बार फिर नारेबाजी शुरू हो गई।
हंगामे के बावजूद सरकार ने विधेयक को पारित करा लिया, जबकि विपक्ष लगातार इसके नाम और प्रावधानों को लेकर आपत्ति जताता रहा।
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