मोटापा और डायबिटीज के इलाज में बड़ा बदलाव, दवाओं की कीमतों में भारी गिरावट

News Saga Desk

नई दिल्ली : भारत में मोटापा और डायबिटीज के इलाज के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। आधुनिक GLP-1 दवाओं का बाजार अगले पांच वर्षों में 12,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इस सेगमेंट में तेजी की मुख्य वजह पेटेंट की समाप्ति और भारतीय कंपनियों की बड़े पैमाने पर एंट्री है।

अब तक विदेशी कंपनियों, विशेषकर नोवो नॉर्डिस्क के वर्चस्व वाले इस बाजार में Semaglutide मॉलिक्यूल का पेटेंट समाप्त होने से घरेलू कंपनियों के लिए नए अवसर खुल गए हैं। इससे आने वाले समय में इलाज के विकल्पों में वृद्धि के साथ-साथ दवाओं की कीमतों में और गिरावट की संभावना है।

कीमतों में गिरावट से बढ़ी पहुंच

दवाओं की कीमतों में आई भारी कमी ने इस आधुनिक इलाज को आम लोगों और मध्यम वर्ग की पहुंच में ला दिया है। पहले जहां इन दवाओं का मासिक खर्च 8,000 से 16,000 रुपये तक होता था, वहीं अब भारतीय कंपनियों की जेनेरिक दवाएं 1,300 से 5,000 रुपये प्रति माह में उपलब्ध हैं।

कुछ मामलों में साप्ताहिक खर्च घटकर 300-400 रुपये तक पहुंच गया है, जिससे डॉक्टरों के लिए अधिक मरीजों को यह दवा सुझाना आसान हो गया है। कीमतों में यह गिरावट भारत जैसे बड़े मरीज आधार वाले देश में गेम-चेंजर साबित हो रही है।

विशाल मरीज आधार और ग्रोथ की संभावना

भारत में इन दवाओं के लिए बड़ा और अभी तक कम उपयोग किया गया बाजार मौजूद है। देश में लगभग 10 करोड़ लोग डायबिटीज और 25 करोड़ लोग मोटापे से प्रभावित हैं। हालांकि, वर्तमान में इन दवाओं की पहुंच डायबिटीज मरीजों में केवल 5% और मोटापे के मामलों में लगभग 4% तक ही सीमित है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता बढ़ने और कीमतों में कमी आने के साथ इन दवाओं का उपयोग तेजी से बढ़ेगा। इसे स्वास्थ्य क्षेत्र की एक बड़ी ग्रोथ स्टोरी माना जा रहा है, जो आने वाले समय में फार्मा सेक्टर की दिशा बदल सकती है।

कंपनियों के बीच बढ़ी प्रतिस्पर्धा

बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए सन फार्मा, जाइडस लाइफसाइंसेज, अल्केम और डॉ. रेड्डीज जैसी प्रमुख कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है। कंपनियां न केवल दवाओं की कीमत कम कर रही हैं, बल्कि उपयोग में आसान पेन डिवाइस और री-यूजेबल विकल्पों पर भी ध्यान दे रही हैं।

उदाहरण के तौर पर, जाइडस ने एडजस्टेबल पेन पेश किया है, जिससे मरीज अपनी जरूरत के अनुसार डोज तय कर सकते हैं, जबकि अल्केम ने कम कीमत पर शुरुआती डोज लॉन्च की है। हालांकि, ये दवाएं टैबलेट और शीशी (वायल) के रूप में भी उपलब्ध हैं, लेकिन सुविधा के कारण पेन डिवाइस अधिक लोकप्रिय हो रहे हैं।

निवेशकों के लिए अवसर

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि GLP-1 सेगमेंट निवेश के लिहाज से एक बड़ा अवसर प्रस्तुत करता है। जो कंपनियां मजबूत सप्लाई चेन बनाएंगी और टियर-2 व टियर-3 शहरों तक पहुंच बढ़ाएंगी, वे इस विस्तार का अधिक लाभ उठा सकेंगी।

अब तक महानगरों तक सीमित ये दवाएं छोटे शहरों के क्लीनिकों तक पहुंचने लगी हैं। आने वाले समय में बेहतर डोज, नए डिवाइस और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के चलते मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि होने की संभावना है, जिससे निवेशकों को स्थिर और बेहतर रिटर्न मिल सकता है।

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