News Saga Desk
भारत के प्रमुख त्योहारों में शामिल मकर संक्रांति को लेकर इस वर्ष भी लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि पर्व 14 जनवरी को मनाया जाए या 15 जनवरी को। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, वर्ष 2026 में मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, 14 जनवरी की रात 9 बजकर 19 मिनट पर सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। उदयातिथि के आधार पर मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को मान्य होगा।

इस दिन श्रद्धालु परंपरागत रूप से दही-चूड़ा, तिल और खिचड़ी का सेवन कर पर्व मनाएंगे। साथ ही पतंग उत्सव भी पूरे उत्साह के साथ मनाया जाएगा, जिससे
आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से गुलजार नजर आएगा। हालांकि मकर संक्रांति के साथ ही खरमास की समाप्ति हो जाती है, लेकिन इस बार शुक्र ग्रह के अस्त रहने के कारण खरमास समाप्ति के बाद भी मांगलिक कार्य संभव नहीं हो सकेंगे।
ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि शुक्र के अस्त रहने की अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे शुभ कार्य शास्त्रसम्मत नहीं माने जाते। शुक्र के उदय के बाद 3 फरवरी से मांगलिक कार्य प्रारंभ होंगे। इसके साथ ही एक बार फिर शहनाइयों की गूंज सुनाई देगी और घर-घर वन्ना-वन्नी के पारंपरिक गीत गूंजने लगेंगे।
प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आचार्य अजय मिश्रा ने पंचांग की गणना के आधार पर बताया कि मकर संक्रांति का पुण्यकाल सुबह 7:15 बजे से शाम 6:21 बजे तक
और महापुण्यकाल सुबह 7:15 बजे से पूर्वाह्न 9:06 बजे तक रहेगा। महापुण्यकाल में गंगा स्नान, दान-पुण्य और पूजा-पाठ का विशेष महत्व बताया गया है।
इस दिन गंगा स्नान कर भगवान सूर्य को अर्घ्य देने से कष्टों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि एवं सौभाग्य बना रहता है।
यदि किसी कारणवश गंगा स्नान संभव न हो, तो स्नान के जल में तिल डालकर स्नान करना भी पुण्यदायी माना गया है। मकर संक्रांति के अवसर पर सनातनी परिवारों में दही-चूड़ा और खिचड़ी का विशेष महत्व रहेगा, वहीं पतंगबाजी के चलते पूरा वातावरण उत्साह और उल्लास से भर जाएगा।
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