News Saga Desk
रांची : झारखंड में नगर निकाय चुनाव की घोषणा मंगलवार को होने की प्रबल संभावना है। सूत्रों के अनुसार, दोपहर 2 बजे राज्य निर्वाचन आयोग की प्रेस वार्ता में चुनाव की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है। यदि ऐसा होता है, तो इस लंबे समय से लंबित चुनावी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का श्रेय जामताड़ा की रीना कुमारी को भी जाएगा।
दरअसल, नगर निकाय चुनाव को लेकर सबसे पहले रीना कुमारी ने आवाज़ उठाई थी। उन्होंने 12 अप्रैल 2023 को झारखंड हाईकोर्ट में रिट याचिका संख्या W.P.(C) No. 1923 of 2023 दायर की थी। इस याचिका में राज्य सरकार, राज्य निर्वाचन आयोग और नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव को पक्षकार बनाते हुए नगर निकाय चुनाव की घोषणा में हो रही देरी का मुद्दा उठाया गया था।
20 अप्रैल 2023 को हुई थी पहली सुनवाई
इस मामले की पहली सुनवाई 20 अप्रैल 2023 को हुई, जिसमें हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। इसके बाद मामला लगातार न्यायालय में आगे बढ़ता रहा। रीना कुमारी की इस पहल से प्रेरित होकर रोशनी खलखो, अरुण कुमार झा, बिनोद कुमार सिंह और सुनील कुमार यादव ने भी 28 अप्रैल 2023 को अलग-अलग याचिकाएं दायर कीं जिनकी याचिका संख्या W.P.(C) No. 2290 of 2023 थी।
कुछ समय बाद हाईकोर्ट ने दोनों मामलों को एक साथ जोड़ते हुए 4 जनवरी 2024 को अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि नगर निकाय चुनाव की प्रक्रिया किसी भी परिस्थिति में बाधित न हो और इसके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर की जाएं।
देरी पर दायर हुई अवमानना याचिका
फैसले के बावजूद जब चुनाव प्रक्रिया में अपेक्षित तेजी नहीं आई, तो रीना कुमारी सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की। 24 नवंबर 2025 को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड पर लिया कि राज्य सरकार ने चुनाव से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज और जानकारियां राज्य निर्वाचन आयोग को सौंप दी हैं, जिसे आयोग ने भी सही बताया। इसके बाद अदालत ने अगली सुनवाई की तिथि 30 मार्च 2026 निर्धारित की।
लोकतंत्र में नागरिक पहल का उदाहरण
सरल शब्दों में कहा जाए तो जामताड़ा की रीना कुमारी ने सबसे पहले साहस दिखाते हुए न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया। उनके प्रयासों से अन्य लोग भी आगे आए और लगातार कानूनी पहल के चलते नगर निकाय चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ सकी। यह पूरा घटनाक्रम इस बात का उदाहरण है कि एक जागरूक नागरिक की पहल भी लोकतंत्र को मजबूती दे सकती है।
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