नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने मंत्रिमंडल का विस्तार कर महावीर पुन को विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार मंत्री नियुक्त किया, सुदन गुरुङ को गृह मंत्री के रूप में पुनः नियुक्ति।
News Saga Desk
काठमाडौं: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने मंगलवार को मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए स्वतंत्र सांसद महावीर पुन को विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार मंत्री नियुक्त किया है। सरकार के प्रवक्ता सस्मित पोखरेल ने बताया कि पुन आज दोपहर 3 बजे राष्ट्रपति कार्यालय शीतल निवास में पद व गोपनीयता की शपथ लेंगे। यह नियुक्ति हाल ही में हुए मंत्रालयों के पुनर्गठन के बाद आई है, जिसमें मंत्रालयों की संख्या 25 से घटाकर 18 कर दी गई और विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के लिए अलग मंत्रालय का गठन किया गया।
महावीर पुन की पृष्ठभूमि और उम्मीदें
महावीर पुन सामाजिक नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में अग्रणी माने जाते हैं। उन्होंने वर्षो से विज्ञान, अनुसंधान और तकनीकी विकास को केंद्र में रखने वाले समर्पित मंत्रालय की मांग की थी। उनकी नियुक्ति से यह अपेक्षा की जा रही है कि नवगठित मंत्रालय के तहत देश में नवाचार को बढ़ावा मिलेगा, तकनीकी शिक्षा और रिसर्च को प्रोत्साहन मिलेगा और स्टार्टअप-आधारित एवं तकनीक आधारित विकास नीतियों को प्राथमिकता दी जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि पुन के नेतृत्व में नीति निर्माण में सामाजिक उद्यमिता के सिद्धांत भी शामिल होंगे, जिससे ग्रामीण और स्थानीय स्तर पर प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों को बढ़ावा मिल सकता है।
मंत्रालय पुनर्गठन और उसका महत्त्व
हालिया पुनर्गठन में मंत्रालयों की संख्या घटाने का मकसद शासन को अधिक समेकित और प्रभावी बनाना बताया जा रहा है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के लिए अलग मंत्रालय का गठन यह संकेत देता है कि सरकार तकनीकी सशक्तिकरण और अनुसंधान-आधारित विकास को रणनीतिक महत्व दे रही है। नए मंत्रालय के तहत अनुसंधान एवं विकास, टेक्नोलॉजी हस्तांतरण, नवाचार प्रणाली और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने पर काम होगा। राजनैतिक और प्रशासकीय सरोकार रखने वाले अधिकारियों ने कहा कि इस कदम से नीति-निर्माण में तेजी और पारदर्शिता आने की संभावना है।
सुदन गुरुङ की पुनर्नियुक्ति और विवाद निपटारा
एक ही मंत्रिमंडल विस्तार में प्रधानमंत्री शाह ने सुदन गुरुङ को पुनः गृह मंत्री नियुक्त करने का भी निर्णय लिया। सरकार प्रवक्ता के अनुसार गुरुङ को वापस खाते हुए उनकी शपथ आज ही दिलाई जाएगी। इससे पहले संपत्ति सम्बन्धी आरोपों के चलते गुरुङ ने गृह मंत्री पद से अपना इस्तीफा दे दिया था। हालांकि सरकार ने आरोपों की जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित की थी; मंगलवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक ने उस समिति की रिपोर्ट स्वीकार कर ली और समिति ने गुरुङ को क्लीन चिट दी। रिपोर्ट के आधार पर उनकी पुनर्नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया और राष्ट्रपति कार्यालय को उनके शपथ ग्रहण की तैयारियां करने के निर्देश दिए गए।
राजनीतिक प्रभाव और प्रतिक्रियाएँ
मंत्रिमंडल विस्तार और पुनर्गठन से नेपाल की आंतरिक राजनैतिक स्थिति पर कई प्रभाव पड़ सकते हैं। महावीर पुन की नियुक्ति से प्रौद्योगिकी और नवाचार के मुद्दे को केंद्रीय स्तर पर मजबूती मिल सकती है, जबकि सुदन गुरुङ की वापसी से गृह मंत्रालय में स्थिरता का संदेश जाएगा। आलोचकों ने अपना बचाव पक्ष रखते हुए कहा है कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से साझा करने से पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और सार्वजनिक विश्वास बढ़ेगा। समर्थक इसे सरकार की निर्णायकता और संगठनात्मक पुनर्संरचना के कदम के रूप में देख रहे हैं।
आगे की प्रक्रिया और चुनौतियाँ
नए मंत्रियों के पदभार ग्रहण के बाद उनकी प्राथमिकता नीति रूपरेखा तैयार करना, मंत्रालयों के भीतर कार्मिक व वित्तीय ढांचे को व्यवस्थित करना और दीर्घकालिक योजनाओं पर काम शुरू करना होगा। विशेषकर विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार मंत्रालय के लिए चुनी गई नीतियाँ अनुसंधान फंडिंग, शिक्षा संस्थानों से जुड़ाव, निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी और ग्रामीण स्तर पर टेक-समाधान पहुँचाने पर केंद्रित होनी चाहिए। वहीं गृह मंत्रालय के सामने कानून-व्यवस्था, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियाँ और सामुदायिक सौहार्द बनाए रखने की जिम्मेदारी होगी।
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