अब थानों के नहीं काटने होंगे चक्कर, बिहार में जमीन विवाद सुलझाने की नई व्यवस्था लागू

News Saga Desk

जमीन विवाद को लेकर थानों और जनता दरबार के चक्कर लगाने वाले लोगों के लिए राहत की खबर है। बिहार सरकार ने भूमि विवाद निपटारे की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब ऐसे मामले सीधे अंचल कार्यालयों में सुलझाए जाएंगे। डिप्टी सीएम सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि जमीन से जुड़े विवादों का समाधान प्रशासनिक स्तर पर किया जाएगा, जिससे पुलिस हस्तक्षेप कम हो सके।

मुजफ्फरपुर में आयोजित भूमि सुधार जनकल्याण संवाद कार्यक्रम के दौरान डिप्टी सीएम ने बताया कि थाना स्तर पर लगने वाले जनता दरबार की व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है और इसकी पूरी जिम्मेदारी अब अंचल प्रशासन को सौंपी जा रही है। उन्होंने कहा कि इससे विवादों के समाधान की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी होगी।

अब तक जमीन विवाद के मामलों में शनिवार को थानों में जनता दरबार का आयोजन होता था, जहां अंचलाधिकारी और थानेदार संयुक्त रूप से मामलों की सुनवाई करते थे। नई व्यवस्था के तहत अब यह पूरी प्रक्रिया अंचल कार्यालयों में होगी। थानेदार संबंधित अंचल में जाकर मामलों में सहयोग करेंगे, जबकि इसकी निगरानी सीधे पुलिस अधीक्षक स्तर से की जाएगी।

डिप्टी सीएम ने बताया कि राजस्व और भूमि सुधार व्यवस्था को जनोन्मुखी और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से ‘भूमि सुधार जनकल्याण संवाद’ की शुरुआत की गई है। इसके तहत सरकार सीधे आम लोगों से संवाद कर जमीन से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझेगी और उनका समाधान करेगी। सरकार का लक्ष्य ऐसी व्यवस्था बनाना है जो व्यक्ति विशेष पर निर्भर न होकर एक मजबूत सिस्टम के रूप में काम करे।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दिसंबर माह में सभी अंचलाधिकारियों और राजस्व कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं, ताकि लंबित मामलों का तेजी से निपटारा किया जा सके। अंचल कार्यालय अब सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक, सप्ताह में छह दिन आम जनता के लिए खुले रहेंगे। लोगों की सुविधा के लिए अंचल कार्यालयों में नियम और प्रक्रियाओं की जानकारी बैनर व पोस्टर के माध्यम से प्रदर्शित की जाएगी।

विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि अपने कार्यकाल के पहले 100 दिनों में वह प्रमंडल और जिला स्तर पर जाकर जनता से संवाद करेंगे। इस दौरान भूमि विवाद, जनशिकायतों और विभागीय कार्यप्रणाली से जुड़ी समस्याओं को समझकर मौके पर ही समाधान की दिशा तय की जाएगी। सरकार का फोकस न सिर्फ मौजूदा शिकायतों के निपटारे पर है, बल्कि भविष्य में विवाद की संभावना को कम करने पर भी रहेगा।

डिप्टी सीएम ने स्वीकार किया कि दाखिल-खारिज, परिमार्जन प्लस और ई-मापी से जुड़े मामलों में सबसे ज्यादा शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इनसे जुड़े लंबित मामलों का निष्पादन 15 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, सरकारी जमीन को निजी नाम से दर्ज कराने जैसी गड़बड़ियों की सूचना देने वालों को सम्मानित करने की बात भी कही गई, ताकि अवैध कब्जे पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

सरकार का मानना है कि अंचल स्तर पर पारदर्शी तरीके से भूमि विवाद का समाधान होने से पुलिस और अदालतों पर बोझ कम होगा और आम लोगों का भरोसा प्रशासन पर बढ़ेगा। नई व्यवस्था के लागू होने के बाद अंचल कार्यालय भूमि विवाद समाधान का मुख्य केंद्र होगा, जबकि पुलिस की भूमिका सहयोग और निगरानी तक सीमित रहेगी।

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