दिल्ली में बीजेपी सरकार का एक साल: कई वादे पूरे,महिलाओं की 2,500 रुपये सहायता अब भी लंबित

News Saga Desk

दिल्ली में 27 साल बाद सत्ता में लौटी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार ने वर्ष 2025 के दौरान अपने कुछ प्रमुख चुनावी वादों को पूरा किया, लेकिन कई अहम घोषणाएं अब भी अमल का इंतजार कर रही हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में बनी सरकार के सामने आने वाला वर्ष अधूरे वादों को पूरा करने की बड़ी चुनौती लेकर आएगा।

आम आदमी पार्टी के करीब एक दशक लंबे शासन के बाद सत्ता में आई बीजेपी ने सबसे पहले स्वास्थ्य क्षेत्र में कदम बढ़ाते हुए दिल्ली में ‘आयुष्मान भारत’ स्वास्थ्य बीमा योजना को लागू करने की दिशा में तेजी दिखाई। इसके अलावा निर्माण श्रमिकों, दिहाड़ी मजदूरों और झुग्गीवासियों के लिए पांच रुपये में रियायती भोजन उपलब्ध कराने वाली ‘अटल कैंटीन’ की शुरुआत भी सरकार की एक अहम उपलब्धि मानी जा रही है।

हालांकि, जिन वादों को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा रही, उनमें से कई अभी कागजों तक ही सीमित हैं। इनमें ‘महिला समृद्धि योजना’ प्रमुख है, जिसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को 2,500 रुपये मासिक सहायता देने का वादा किया गया था। इस योजना का लाभ महिलाओं को अब तक नहीं मिल पाया है। इसी तरह, 500 रुपये में रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने और होली व दीवाली पर साल में दो बार मुफ्त सिलेंडर देने की घोषणा भी अब तक लागू नहीं हो सकी है।

सरकार ने शासन को आम लोगों के करीब लाने के लिए प्रशासनिक सुधारों पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने सरकारी आवास ‘मुख्यमंत्री जन सेवा सदन’ में साप्ताहिक जनसुनवाई की शुरुआत की। साथ ही प्रशासनिक पुनर्गठन करते हुए दो नए जिले बनाए गए, जिससे दिल्ली में जिलों की संख्या बढ़कर 13 हो गई।

शहरी समस्याओं की बात करें तो वायु प्रदूषण सरकार के लिए अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। ‘पीयूसीसी नहीं तो ईंधन नहीं’ जैसे नियम, यांत्रिक सफाई, एंटी-स्मॉग गन और पानी के छिड़काव जैसे उपाय किए गए, लेकिन इनसे केवल अस्थायी राहत ही मिल सकी और प्रदूषण की समस्या बनी रही।

शिक्षा के क्षेत्र में सरकार ने निजी स्कूलों की फीस पर लगाम लगाने के उद्देश्य से ‘दिल्ली विद्यालय शिक्षा (शुल्क निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2025’ पेश किया। स्वास्थ्य क्षेत्र में ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ और बुजुर्गों के लिए ‘वय वंदना योजना’ की शुरुआत की गई। इसके अलावा निर्माणाधीन 11 अस्पताल परियोजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है, जिससे 10 हजार से अधिक नए बेड जुड़ने की उम्मीद है।

वित्तीय मोर्चे पर मुख्यमंत्री ने 2025-26 के लिए एक लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया, जिसमें सड़कों, पेयजल आपूर्ति और यमुना नदी के पुनरुद्धार को प्राथमिकता दी गई। सरकार ने 500 किलोमीटर सड़कों की मरम्मत का लक्ष्य रखा है और कई लंबित फ्लाईओवर व सड़क परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए मंजूरियां प्राप्त की हैं।

जल प्रबंधन के क्षेत्र में लंबे समय से प्रतीक्षित जल निकासी की मुख्य योजना पेश की गई, जिसका उद्देश्य अगले पांच वर्षों में जलभराव और बाढ़ से होने वाली परेशानियों को कम करना है। इसके साथ ही दिल्ली जल बोर्ड की बकाया राशि वसूलने के लिए पानी के बिल पर एकमुश्त विलंब शुल्क माफी की घोषणा की गई। यमुना की सफाई को लेकर 45 सूत्री कार्ययोजना के जरिए काम तेज करने की कोशिश की जा रही है।

‘सेवा पखवाड़ा’ कार्यक्रमों के तहत 1,800 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की शुरुआत भी की गई है। जैसे-जैसे दिल्ली 2026 की ओर बढ़ रही है, वैसे-वैसे रेखा गुप्ता सरकार के सामने सबसे बड़ी कसौटी अपने अधूरे कल्याणकारी वादों, खासकर महिलाओं से जुड़े वादों को जमीन पर उतारने की होगी।

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