News Saga Desk
नई दिल्ली। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के स्थान पर ‘विकसित भारत–जी राम जी विधेयक, 2025’ पारित किए जाने के विरोध में विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में गुरुवार रात से शुक्रवार सुबह तक करीब 12 घंटे का धरना दिया। इस विरोध प्रदर्शन का वीडियो समाचार एजेंसी पीटीआई ने जारी किया है, जिसमें तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद डोला सेन सहित कई सांसद रातभर धरने पर बैठे नजर आ रहे हैं।
कांग्रेस नेता मुकुल वासनिक ने कहा कि जब मनरेगा का मसौदा तैयार किया गया था, तब 14 महीने तक व्यापक परामर्श किया गया था और इसे संसद ने सर्वसम्मति से पारित किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि नया विधेयक राज्यों पर अत्यधिक आर्थिक बोझ डालेगा, जिससे योजना के असफल होने का खतरा है।
टीएमसी सांसद डोला सेन ने कहा कि मनरेगा के माध्यम से गरीब और वंचित वर्ग को रोजगार मिलता था। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाना स्वतंत्रता सेनानियों और गांधीजी का अपमान है। डोला सेन ने यह भी कहा कि नया विधेयक राज्यों पर लगभग 40 प्रतिशत आर्थिक भार डालेगा, जिससे राज्य सरकारों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा।
गौरतलब है कि संसद ने गुरुवार को ‘विकसित भारत–जी राम जी विधेयक, 2025’ को मंजूरी दे दी। यह विधेयक पहले लोकसभा और फिर देर रात राज्यसभा से पारित हुआ। टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने आरोप लगाया कि सरकार ने केवल पांच घंटे का नोटिस देकर इस अहम विधेयक को पारित कराया और उचित चर्चा का मौका नहीं दिया। उन्होंने इसे गरीब-विरोधी, किसान-विरोधी और ग्रामीण जनता के खिलाफ बताया।
वहीं, कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इसे देश के श्रमिक वर्ग के लिए “दुखद दिन” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा को खत्म कर सरकार ने करीब 12 करोड़ लोगों की आजीविका पर हमला किया है और यह कदम मोदी सरकार के किसान-विरोधी और गरीब-विरोधी रवैये को दर्शाता है।
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